नई दिल्ली: अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। खबर है कि दोनों देशों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाने का फैसला किया है। बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कनाडाई सामानों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए 700 से अधिक अमेरिकी उत्पादों पर 15 से 50 फीसदी तक शुल्क लागू कर दिया है। कनाडा का यह नया टैरिफ मंगलवार, 8 सितंबर से प्रभावी हो गया।
किन-किन चीजों का बढ़ाया गया शुल्क
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा की ओर से लगाया गया यह शुल्क करीब 27.6 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामानों को प्रभावित कर सकता है। इसमें डेयरी और कृषि से जुड़े उत्पादों के अलावा कागज, घरेलू उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, मोटरसाइकिल, कपड़े और कुछ कॉस्मेटिक उत्पाद शामिल हैं। वहीं अमेरिका से आयात होने वाले स्टील, एल्युमीनियम और लोहे से जुड़े उत्पादों पर शुल्क बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया है।
कनाडा ने अपने इस फैसले को अमेरिका की पिछली टैरिफ नीति का जवाब बताया है। बताया जा रहा है कि 22 अगस्त को अमेरिका ने करीब 20 अरब डॉलर मूल्य के कनाडाई उत्पादों पर अतिरिक्त 50 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।
कनाडा ने क्या कहा
कनाडा के वित्त विभाग ने कहा है कि जवाबी शुल्क का उद्देश्य देश के श्रमिकों, उत्पादकों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के हितों की रक्षा करना है। दूसरी ओर, ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 15 सितंबर से मौजूदा 50 फीसदी टैरिफ का दायरा और कनाडाई उत्पादों तक बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही 29 सितंबर से कुछ डेयरी उत्पादों, मोटरसाइकिलों और शराब से जुड़े आयात पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की बात भी कही गई है।
अमेरिका-कनाडा के बीच कितना कारोबार?
अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार रहे हैं। 2025 में अमेरिका ने कनाडा को करीब 333.6 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि कनाडा से अमेरिका ने लगभग 381.9 अरब डॉलर का आयात किया। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, वाहन, मशीनरी, विमान, फार्मास्यूटिकल्स, फर्नीचर, कपड़े और खाद्य-पेय समेत कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर कारोबार होता है। ऐसे में बढ़ती टैरिफ जंग का असर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के साथ वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है।












