7.8% की शानदार ग्रोथ के साथ IMF ने भारत को दुनिया की वृद्धि का प्रमुख इंजन बताया

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नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई धुंध के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत को ‘दुनिया की वृद्धि का प्रमुख इंजन’ करार देते हुए देश के आर्थिक आंकड़ों और सांख्यिकीय प्रणाली पर अपनी मजबूत मुहर लगा दी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में दर्ज की गई 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी (Real GDP) वृद्धि दर ने न केवल वैश्विक वित्तीय विश्लेषकों को चौंकाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों के अनुमानों को भी काफी पीछे छोड़ दिया है।

सेवा क्षेत्र और निर्यात का मिला जबरदस्त सहारा

अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत बनी हुई है। इस पहली तिमाही में भारत के सेवा क्षेत्र और निर्यात के मोर्चे पर असाधारण प्रदर्शन देखा गया। 
घरेलू मांग में आई तेजी ने बाहरी झटकों को काफी हद तक सोख लिया, जिससे विकास की रफ्तार को सीधे तौर पर गति मिली।

‘ग्लोबल ग्रोथ का इंजन भारत’

वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान IMF के संचार विभाग की निदेशक जूली कोजैक ने भारत के नए आर्थिक डेटा सिस्टम की सराहना की। उन्होंने कहा कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) की नई तथा अद्यतन श्रृंखलाओं से भारत के जीडीपी अनुमानों की सटीकता में और सुधार आएगा। 
अंतरराष्ट्रीय मंच से आया यह बयान उन घरेलू राजनीतिक बहसों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है, जिनमें आंकड़ों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। IMF ने स्पष्ट किया कि डेटा ढांचे को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए भारत के सांख्यिकी विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदम अंतरराष्ट्रीय मानकों के बिल्कुल अनुकूल हैं।

पहली तिमाही का पूरा ब्योरा

FY 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.8% रही, जो पिछले साल की समान अवधि के 6.9% के मुकाबले उल्लेखनीय बढ़त दर्शाती है। 2022-23 के आधार वर्ष के आधार पर स्थिर कीमतों पर भारत की रियल जीडीपी ₹81.36 लाख करोड़ दर्ज की गई, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में ₹75.46 लाख करोड़ थी। मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल जीडीपी 10.3% की बढ़त के साथ ₹88.27 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गई, जो बीते वर्ष ₹80 लाख करोड़ के आसपास थी। उत्पादन की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाला रियल GVA 8.2% की दर से बढ़कर ₹73.82 लाख करोड़ हो गया, जबकि नॉमिनल GVA 11.5% उछलकर ₹80.53 लाख करोड़ के आंकड़े पर पहुंच गया।

आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करने पर पता चलता है कि देश में निर्माण गतिविधियों और सरकारी पूंजीगत व्यय में भारी वृद्धि हुई है। बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हो रहे खर्च ने सीधे तौर पर रोज़गार के नए अवसर पैदा किए हैं और बाज़ार में नकदी के प्रवाह को बनाए रखा है। आंकड़ों की पारदर्शिता और नए डेटा सेट को लेकर चल रहे विवादों के बीच IMF की यह टिप्पणी भारतीय नीतियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है।

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