नई दिल्ली: इस साल विश्वकर्मा पूजा की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में कन्फ्यूजन बना हुआ है कि यह 17 सितंबर को मनाई जाएगी या 18 सितंबर को। सही तारीख जानने के लिए कन्या संक्रांति के समय को समझना जरूरी है। जिस दिन सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं उसी दिन विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। इस अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा की जाती है और दुकान, मशीन, औजार तथा वाहनों की भी पूजा होती है। इस बार दो शुभ योग भी बन रहे हैं जो पूजा को और फलदायी बनाते हैं।
सही तारीख और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार सूर्य देव 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए कन्या संक्रांति 17 सितंबर को ही है और विश्वकर्मा पूजा भी गुरुवार 17 सितंबर को मनाई जाएगी। 18 सितंबर की कोई जरूरत नहीं है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर यह पर्व आता है। पूजा का मुख्य शुभ समय सुबह 7:58 बजे से शुरू होता है क्योंकि तभी कन्या संक्रांति का क्षण है।
सुबह 10:43 से दोपहर 1:48 के बीच भी पूजा की जा सकती है। इसमें चर-सामान्य मुहूर्त 10:43 से 12:15 और लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:15 से 1:48 तक रहेगा। शाम को 4:52 से 6:24 तक शुभ-उत्तम मुहूर्त है। कन्या संक्रांति का पुण्यकाल सुबह 7:58 से दोपहर 2:31 तक चलेगा। ब्रह्म मुहूर्त 4:33 से 5:20 और अभिजीत मुहूर्त 11:51 से 12:40 तक है। राहुकाल दोपहर 1:48 से 3:20 तक रहेगा इसलिए इस समय कोई शुभ काम न करें।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
इस साल सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:07 से शाम 7:53 तक और रवि योग भी एक साथ बन रहा है। ये दोनों योग बहुत फलदायी माने जाते हैं। सुबह विष्कम्भ योग रहेगा जो दोपहर 12:50 तक चलेगा उसके बाद प्रीति योग रात तक रहेगा। अनुराधा नक्षत्र शाम 7:53 तक और फिर ज्येष्ठा नक्षत्र होगा। भगवान विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पी और ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं। उन्होंने सोने की लंका, द्वारका, इंद्रप्रस्थ जैसी नगरी तथा पुष्पक विमान और देव अस्त्रों का निर्माण किया था। उनकी पूजा से व्यापार, सुख, समृद्धि और शांति में बढ़ोतरी होती है।












