पटना: अगर आपको भी बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। 28, 29 और 30 सितंबर को प्रस्तावित बैंक हड़ताल को लेकर केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स की इस हड़ताल के मद्देनजर वित्त मंत्रालय ने सोमवार को एक अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक वित्त मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में होगी, जिसमें सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, ग्रामीण बैंकों और नाबार्ड के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे।
इस दौरान हड़ताल के दौरान ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं किस तरह उपलब्ध कराई जाएं, इस पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ ही वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था बनाने पर भी विचार किया जाएगा। आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी ने शनिवार को जानकारी दी कि मुख्य श्रमायुक्त ने 22 और 23 सितंबर को इंडियन बैंक एसोसिएशन, बैंक प्रबंधन और वित्त मंत्रालय के प्रतिनिधियों को समझौता वार्ता के लिए बुलाया है। इन बैठकों में यूनियनों की मांगों पर बातचीत होगी और यह देखा जाएगा कि क्या हड़ताल को टाला जा सकता है।
क्या हैं यूनियनों की प्रमुख मांगें
बैंक यूनियनों की सबसे बड़ी मांग पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की है। इसके अलावा PLI का बिना भेदभाव भुगतान, खाली पदों पर जल्द भर्ती और प्रमोशन, IDBI के विदेशीकरण पर रोक लगाने और पेंशन अपडेशन जैसी मांगें भी शामिल हैं। इन मांगों को लेकर यूनियनें लगातार दबाव बना रही हैं।
लगातार 5 दिन प्रभावित हो सकता है बैंकिंग काम
डीएन त्रिवेदी के मुताबिक, अगर वार्ता में कोई सकारात्मक हल नहीं निकला, तो बिहार में बैंक लगातार पांच दिनों तक बंद रह सकते हैं। दरअसल 26 सितंबर को चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार होने के कारण बैंकों में पहले से ही छुट्टी रहेगी। इसके ठीक बाद 28, 29 और 30 सितंबर को हड़ताल प्रस्तावित है, जिससे कुल मिलाकर पांच दिन तक बैंकिंग सेवाएं ठप पड़ सकती हैं।
हड़ताल की स्थिति में ग्राहकों को होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्रालय ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। बैठक में यह तय किया जाएगा कि बैंकिंग सेवाओं को किस तरह सुचारू रखा जाए। अब सबकी नजरें आगामी वार्ता के नतीजों पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि हड़ताल होगी या टल जाएगी।












