कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ लद्दाख के गांव में बसी लड़की, वीडियो देख हैरान रह गए लोग

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नई दिल्ली: पहाड़ों पर घूमने जाना और कुछ दिन वहां बिताकर वापस शहर लौट आना, यह तो हम सबने किया है। लेकिन कभी सोचा है कि कोई अपनी अच्छी-खासी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर पूरे दो महीने के लिए लद्दाख के किसी दूरदराज गांव में बस जाए? नयनतारा चौहान ने ठीक यही किया है, और अब उनके सोशल मीडिया वीडियो लोगों को गांव की असली जिंदगी की एक ऐसी झलक दिखा रहे हैं, जो किसी आम टूरिस्ट के अनुभव से बिल्कुल अलग है।

नयनतारा पहले कॉर्पोरेट लॉयर के तौर पर काम करती थीं, लेकिन उन्होंने यह नौकरी छोड़कर मनाली में आउटडोर शेफ बनने का फैसला किया। अब वे लेह के साबु गांव में अपने एक दोस्त के घर रह रही हैं। उनका कहना है कि जब लोगों को पता चलता है कि वे दो महीने लद्दाख में गुजार रही हैं, तो सब कहते हैं कि उनकी जिंदगी बिल्कुल सेट लगती है। लेकिन असल अनुभव लोगों की सोच से काफी अलग निकला।

ड्राई टॉयलेट से समझी पानी की कीमत

नयनतारा बताती हैं कि गांव में ड्राई टॉयलेट का इस्तेमाल करना शुरुआत में उनके लिए काफी नया और अजीब अनुभव था, जिसके साथ ढलने में उन्हें करीब एक हफ्ता लग गया। यहां पानी की जगह पेपर और मिट्टी का इस्तेमाल होता है। इस अनुभव ने उन्हें पानी की असली अहमियत भी समझाई, क्योंकि शहरों में एक फ्लश में जितना पानी बहा दिया जाता है, उसका अंदाजा उन्हें यहां आकर हुआ। गांव में पानी की व्यवस्था भी शहरों जैसी आसान नहीं है। पास बहने वाली नदी पर पूरी सप्लाई निर्भर करती है, और नदी का जलस्तर ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार पर बदलता रहता है। जब पानी कम बहता है, तो गांव वाले मिलकर रास्ता बनाते हैं और रबड़ पाइप-मोटर की मदद से पानी घरों तक पहुंचाते हैं।

साधारण जिंदगी में मिला असली सुकून

नयनतारा के मुताबिक शाम की ठंडी हवा में चाय पीने का यहां अपना अलग ही मजा है। पिज्जा-बर्गर जैसी चीजें भले न मिलें, लेकिन ताजी सब्जियां आसानी से उपलब्ध रहती हैं। यहां के लोग आपस में मिलते-जुलते हैं, हालचाल पूछते हैं और साथ बैठकर वक्त बिताते हैं। यही सादगी और आपसी जुड़ाव नयनतारा को इतना भाया कि अब उनका मन यहीं बस जाने का करने लगा है। नयनतारा ने अपने इंस्टाग्राम पर इस अनुभव से जुड़े कुल 28 वीडियो शेयर किए हैं, जिनमें उन्होंने सिर्फ खूबसूरत नजारे नहीं, बल्कि गांव की चुनौतियां भी दिखाई हैं। लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रही हैं, कुछ इसे सपनों जैसी जिंदगी बता रहे हैं तो कुछ इसे किसी जगह को सही मायनों में समझने का तरीका कह रहे हैं।

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