पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब सरकार में सरकारी तबादलों और पोस्टिंग में लेन-देन आदि के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पंजाब मंत्री मंडल की मीटिंग के बाद चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पंजाब में पुरानी सरकारों ने पहले ही सीबीआई के सीधे हस्ताक्षेप पर रोक लगाई हुई है। इसी को लेकर पंजाब सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच की जाएगी और सीबीआई जांच का विरोध किया जाएगा।
डीजीपी को तीन पत्र लिखकर लगाए थे आरोप
गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आज पंजाब में सरकारी तबादलों और पदों में लेन-देन आदि के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंप दी है। पटीशनकर्ता निखिल सराफ ने हाई कोर्ट में दायर पटीशन में सरकारी पदों पर तैनात व्यक्तियों ते सरकारी उच्च अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लाए थे और मुख्य मंत्री दफ्तर के कुछ व्यक्तियों पर भी उंगल उठाई गई थी। ईडी की ओर से इससे पहले पंजाब के डीजीपी को तीन पत्र लिखकर सरकारी तबादलों, तैनातियों और अन्य लेन-देन में भ्रष्टाचार के आरोप लाए गए थे। चीफ जस्टिस की अगवाई वाले बेंच ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जानी चाहिए क्योंकि इस मामले में पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई संतुष्टिजनक नहीं है।
दो माह में आएगी जांच रिपोर्ट
बेंच ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश सुनाए हैं, जो एफआईआर दर्ज करके तुरंत जांच शुरू करेगी। बेंच ने इस मामले की जांच रिपोर्ट दो महीनों के अंदर देने के लिए कहा है। इस फैसले को लेकर पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह सीबीआई जांच का विरोध करेगी और इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में किसी भी तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार है, पर सीबीआई के सीधे दखल को स्वीकार नहीं किया जाएगा।












