CJP प्रोटेस्ट में वकीलों की एंट्री, सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर तक निकला मार्च

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नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने भी मोर्चा खोल दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वकीलों ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से जंतर-मंतर तक मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने रास्ते में ही कई वकीलों को हिरासत में ले लिया।

बता दें, प्रदर्शनकारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित धांधली का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया के नाम पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।

SCBA ने पुलिस कार्रवाई की निंदा की

वकीलों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने कड़ी नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे सीनियर, जूनियर और महिला वकीलों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। SCBA ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मामले में दखल देने की अपील की है। एसोसिएशन की मांग है कि हिरासत में लिए गए सभी वकीलों का पता लगाया जाए, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, उन्हें कानूनी मदद दी जाए और बिना वैध कारण हिरासत में रखे गए वकीलों को तुरंत रिहा किया जाए। साथ ही पुलिस के बल प्रयोग की जांच कर कार्रवाई हो।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं

CJP और युवा संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। दिल्ली पुलिस ने देर से आवेदन और कानून-व्यवस्था का हवाला देकर अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और राजधानी में 23 हजार से ज्यादा जवान तैनात किए गए। कई जगह बैरिकेडिंग की गई और मेट्रो व रेल आवाजाही पर भी असर पड़ा।

मुंबई से आए CJP नेता हिरासत में

इससे पहले CJP ने आरोप लगाया कि उसके तीन नेता अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचते ही विमान के अंदर से हिरासत में ले लिया गया। पार्टी द्वारा शेयर किए गए वीडियो में दीपके पुलिस से कहते दिखे कि वे गिरफ्तारी देने ही आए हैं। CJP ने इसे आवाजाही की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए नेताओं की बिना शर्त रिहाई की मांग की है। उधर, चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में हेरफेर के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR का मकसद सूची को साफ करना और फर्जी नाम हटाना है।

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