नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा की प्रथम समिति में भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। भारत ने साफ कहा कि परमाणु हथियारों को रोजमर्रा की डिप्लोमेसी का हथियार नहीं बनाया जा सकता और भारत किसी भी परमाणु ब्लैकमेल के सामने नहीं झुकेगा। जिनेवा में भारत के वरिष्ठ सलाहकार अनमोल शेर सिंह बेदी ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया। पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। भारत ने पाकिस्तान से अवैध कब्जे वाले इलाकों को खाली करने को कहा।
भारत ने कहा कि वह शांति का पक्षधर है, लेकिन अगर गैर-जिम्मेदाराना हरकतों पर जवाबदेही तय नहीं हुई तो शांति सिर्फ दो संकटों के बीच का ठहराव बनकर रह जाएगी।
पाकिस्तान का संकट पैदा करने का पैटर्न
भारत ने पाकिस्तान के पैटर्न को भी बेनकाब किया। भारत ने कहा कि पहले सीमा पार से उकसावे की कार्रवाई होती है, फिर उससे इनकार किया जाता है और जब भारत जवाब देता है तो संयम की बात कही जाती है। गैर-राज्य तत्वों की आड़ में हिंसा कराने से किसी देश की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती और भारत का आत्मरक्षा का अधिकार सुरक्षित है।
भारत की तीन रेड लाइन
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से अपनी तीन स्पष्ट नीति बताई। पहली – भारत पर किसी भी आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। दूसरी – भारत परमाणु धमकी के आगे नहीं झुकेगा। तीसरी – आतंक को पनाह देने वालों, पैसा देने वालों और साजिश रचने वालों में कोई फर्क नहीं किया जाएगा।
सिंधु जल संधि और ऑपरेशन सिंदूर पर रुख
भारत ने बताया कि पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या के बाद ऑपरेशन सिंदूर आत्मरक्षा में उठाया गया संतुलित कदम था। सिंधु जल संधि आपसी विश्वास पर टिकी थी, इसलिए जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता, यह संधि स्थगित रहेगी। साथ ही भारत ने ए.क्यू. खान नेटवर्क का जिक्र कर परमाणु प्रसार पर चिंता जताई और दुनिया से अपील की कि उन्नत हथियारों के ट्रांसफर पर सख्ती बरती जाए।












