नई दिल्ली: बच्चों के स्वस्थ भविष्य की नींव मजबूत करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शिशु पोषण के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। छह महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव पेश किया गया है। इस पहल का मकसद जीवन के शुरुआती महीनों में बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप उचित पोषण उपलब्ध कराना और अतिरिक्त शर्करा के अनावश्यक सेवन को रोकना है।
नियमों में बदलाव का मसौदा जारी
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम 2020 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। यह मसौदा 16 अक्टूबर को भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुआ। प्रस्ताव के अनुसार छह महीने तक की आयु के शिशुओं के लिए निर्धारित खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रक्टोज नहीं मिलाए जा सकेंगे।
शुरुआती छह महीने बेहद अहम
जीवन के पहले छह महीने शिशु के शारीरिक विकास और सेहत के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान उचित पोषण बच्चे की वृद्धि और भविष्य के स्वास्थ्य में अहम भूमिका निभाता है। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य शिशु आहार में अनावश्यक अतिरिक्त शर्करा को रोकना है। इससे बचपन में मोटापे और खानपान से जुड़ी दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने के व्यापक प्रयासों को भी समर्थन मिल सकता है।
पहले से तय हैं पोषण संबंधी मानक
मौजूदा नियमों में जन्म से लेकर 24 महीने तक के बच्चों के लिए विभिन्न श्रेणियों के शिशु आहार की गुणवत्ता, सुरक्षा और पोषण संबंधी आवश्यकताएं निर्धारित हैं। वर्तमान व्यवस्था में कार्बोहाइड्रेट के लिए लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है। कुछ परिस्थितियों में निर्धारित सीमाओं के अधीन सुक्रोज और फ्रक्टोज मिलाने की अनुमति भी है। नए प्रस्ताव में छह महीने तक के शिशुओं के उत्पादों के लिए इस व्यवस्था को और सख्त करने की तैयारी है।
जनता से मांगे गए सुझाव
एफएसएसएआई ने मसौदे पर संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। राजपत्र की प्रतियां सार्वजनिक होने की तारीख से 60 दिनों के भीतर सुझाव भेजे जा सकेंगे। प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद संशोधन को अंतिम रूप दिया जाएगा।स्वास्थ्य संबंधी इस पहल के साथ पहले छह महीनों तक केवल स्तनपान को प्रोत्साहित करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य सिफारिशों पर भी जोर दिया गया है।
Reported By: Pankaj Rai












