यमन में जंग फिर भड़की, सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए मिस्र ने हरसंभव मदद का ऐलान किया

0
6

काहिरा/रियाद: मध्य पूर्व में सुरक्षा की स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण होती दिखाई दे रही है। यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच संघर्ष दोबारा बढ़ने की खबरों के बीच मिस्र ने अपने अहम क्षेत्रीय साझेदार की सहायता करने की इच्छा जाहिर की है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने रविवार को स्पष्ट किया कि उनका देश सऊदी अरब की स्थिरता बनाए रखने के लिए जरूरी सहयोग देने को तैयार है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब सऊदी अरब को अपने महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रतिष्ठानों और तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे की हिफाजत को लेकर सतर्क रहना पड़ रहा है।

मिस्र के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, सहायता का उद्देश्य सऊदी क्षेत्र की अखंडता, राष्ट्रीय संसाधनों और इस्लाम के पवित्र स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके बाद दोनों देशों के रक्षा संबंधों और क्षेत्रीय रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

राष्ट्रीय रक्षा परिषद की बैठक के बाद हुआ ऐलान

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मिस्र की ओर से यह घोषणा राष्ट्रीय रक्षा परिषद की बैठक के बाद की गई। इस बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रपति अल-सीसी ने की। इसमें संसद के अध्यक्ष, प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रस्ताव पर विचार और मतदान के लिए संसद का विशेष सत्र दोपहर एक बजे निर्धारित किया गया था। इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति में मिस्र को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देना बताया गया, जब सऊदी अरब की ओर से सुरक्षा सहायता मांगी जाए। हालांकि, सहायता किस स्वरूप में दी जाएगी और इसके लिए कौन-से कदम उठाए जाएंगे, यह संबंधित सरकारी फैसलों पर निर्भर करेगा।

सऊदी नेतृत्व के साथ मिस्र का लगातार संपर्क

मिस्र के राष्ट्रपति ने शनिवार को अपने संबोधन में कहा था कि उनका देश सऊदी अरब के किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के निर्देशों के अनुरूप कदम उठाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस ने 15 सितंबर को राष्ट्रपति अल-सीसी से मुलाकात की थी। यमन में संघर्ष दोबारा तेज होने के बीच दोनों नेताओं के बीच हुई इस मुलाकात को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मिस्र और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बना हुआ है।

आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी की पुरानी कहानी

सऊदी अरब और मिस्र मध्य पूर्व के करीबी साझेदारों में शामिल हैं। वर्ष 2013 में मिस्र की सेना द्वारा राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटाए जाने के बाद सऊदी अरब और खाड़ी क्षेत्र के अन्य संपन्न देशों ने मिस्र को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी। इस मदद में निवेश, केंद्रीय बैंक में जमा राशि और अन्य आर्थिक सहयोग शामिल था। दोनों देशों के संबंध केवल आर्थिक मामलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक मुद्दों पर भी उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा है।

यमन के संघर्ष में पहले भी शामिल रहा है मिस्र

वर्ष 2015 में मिस्र उस गठबंधन का हिस्सा बना था, जिसकी अगुवाई सऊदी अरब कर रहा था। इस गठबंधन ने यमन की सरकार का समर्थन करते हुए हूती विद्रोहियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, उस अभियान में मिस्र की प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका सीमित रही थी। अब ताजा घोषणा के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

मिस्र की ओर से सहायता की पेशकश सऊदी अरब के लिए कूटनीतिक समर्थन का संकेत है। लेकिन दोनों देशों के बीच आगे किस तरह का सहयोग होगा, यह सऊदी अरब की संभावित मांग और मिस्र सरकार के आगामी फैसलों से स्पष्ट होगा। फिलहाल, यमन में संघर्ष की स्थिति और हूती विद्रोहियों की गतिविधियां पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अहम बनी हुई हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here