10 साल की CBI जांच के बाद भी जाट आंदोलन के सभी 56 आरोपी बरी, तो असली अराजक कौन?

0
5

हिसार: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में हरियाणा के करनाल में निकाली जा रही ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के बीच प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता राकेश दलाल ने केंद्र और हरियाणा सरकार से कई तीखे सवाल पूछे हैं। पर्यावरण संरक्षण, अवैध खनन के खिलाफ अभियान और खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिरों की धरोहर के संरक्षण के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चला चुके राकेश दलाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर वर्ष 2016 के जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद की जांच प्रक्रिया पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।

2016 की हिंसा पर राकेश दलाल का सवाल, पूछा- नुकसान और मौतों का जिम्मेदार कौन?

राकेश दलाल ने सवाल उठाया कि जिस सरकार द्वारा आज प्रदेश में अराजकता खत्म करने और लोकतंत्र बचाने के नारे दिए जा रहे हैं, वह पहले यह बताए कि वर्ष 2016 में हरियाणा में हुई व्यापक हिंसा का असली जिम्मेदार कौन था? उनके अनुसार, उस आंदोलन के दौरान प्रदेश को 34 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ और 35 से ज्यादा लोगों की जान गई। उन्होंने रोहतक में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री के आवास पर उनके परिवार सहित आगजनी की कोशिश का भी उल्लेख किया।

10 साल की CBI जांच के बाद भी नहीं मिला जवाब

दलाल ने कहा कि इतने गंभीर मामले की जांच हरियाणा सरकार की सिफारिश पर देश की प्रमुख जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपी गई थी। उनके मुताबिक, करीब 10 साल तक चली जांच और 127 गवाहों की गवाही के बावजूद फरवरी 2026 में विशेष सीबीआई अदालत ने सबूतों के अभाव में 56 मुख्य आरोपियों को बरी कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि यदि इतने लंबे समय तक चली जांच के बाद भी अदालत में आरोप साबित नहीं हो सके, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? क्या यह जांच एजेंसियों की विफलता थी या फिर मामले को समय के साथ ठंडा पड़ने देने की कोशिश की गई? उन्होंने कहा कि यदि अदालत में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले, तो प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि उस हिंसा के वास्तविक जिम्मेदार कौन थे।

90 से अधिक अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रकाश सिंह कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में 90 से अधिक वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की भूमिका तथा प्रशासनिक विफलता पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने पूछा कि जब प्रदेश में हिंसा और अराजकता का माहौल था, तब जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की गई? केवल तबादलों तक कार्रवाई सीमित क्यों रही? क्या प्रशासनिक जवाबदेही तय करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है?

प्रचार और जमीनी हकीकत में अंतर का आरोप

राकेश दलाल ने प्रदेश में विकास के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने हिसार के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नाम पर सीमित एयरोड्रम संचालन और कानून-व्यवस्था की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के बड़े-बड़े दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर दिखाई देता है। जनता को केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल पर परिणाम चाहिए।

न्याय और जवाबदेही से ही मजबूत होगा लोकतंत्र

राकेश दलाल ने कहा कि लोकतंत्र केवल रैलियों, नारों और पदयात्राओं से मजबूत नहीं होता, बल्कि लोकतंत्र की असली ताकत न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही में होती है। जब तक पीड़ितों को न्याय और दोषियों को सजा नहीं मिलेगी, तब तक लोकतंत्र बचाने के दावे अधूरे रहेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह पर्यावरण, अवैध खनन के खिलाफ और देश की ऐतिहासिक धरोहर खजुराहो के संरक्षण के लिए उन्होंने लंबी लड़ाई लड़ी है, उसी तरह हरियाणा में न्याय और जवाबदेही की लड़ाई भी जारी रखेंगे। अंत में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया कि वर्ष 2016 की हिंसा, प्रशासनिक विफलता और जांच के नतीजों पर सरकार जनता को स्पष्ट जवाब कब देगी? हरियाणा की जनता को आखिर न्याय कब मिलेगा।

Reported By: Praveen Kumar

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here