नई दिल्ली की सत्ता की धुरी कहे जाने वाले साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय का स्थानांतरण अब करीब नजर आ रहा है. दशकों से देश के शीर्ष फैसलों का गवाह रहा यह ऐतिहासिक भवन जल्द ही एक नए पते को सौंप सकता है. सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत बने सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स को देश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली का नया केंद्र बनाने की तैयारी है. यह बदलाव केवल पता बदलने का नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में नए दौर की शुरुआत का संकेत देता है.
साउथ ब्लॉक से विदाई की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय लंबे समय से साउथ ब्लॉक में स्थित रहा है. जवाहरलाल नेहरू से लेकर अब तक सभी प्रधानमंत्रियों ने यहीं से काम किया. अब संकेत हैं कि यह परंपरा टूटने जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय जल्द ही यहां से हटकर नए परिसर में स्थानांतरित हो सकता है. हालांकि सरकार की ओर से अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन तैयारियां अंतिम चरण में बताई जा रही हैं.
सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स क्यों खास
दारा शिकोह रोड पर स्थित सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान का अहम हिस्सा है. यहां प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के लिए अलग-अलग इमारतें बनाई गई हैं. इस कॉम्प्लेक्स को आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि नीति निर्माण और सुरक्षा से जुड़े विभाग एक ही परिसर में बेहतर समन्वय के साथ काम कर सकें.
14 जनवरी को शिफ्टिंग की अटकलें
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 14 जनवरी, मकर संक्रांति के दिन नए कार्यालय में शिफ्ट हो सकते हैं. इससे पहले कैबिनेट सचिवालय सितंबर में ही सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में स्थानांतरित हो चुका है. वहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के भी जल्द वहां पहुंचने की संभावना है. यदि यह शिफ्टिंग होती है, तो यह सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक बड़ा मील का पत्थर माना जाएगा.
नई इमारत, नई सुविधाएं
सूत्रों के मुताबिक, नए प्रधानमंत्री कार्यालय में अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी. भवन का निर्माण लार्सन एंड टुब्रो ने किया है, जिसे यह परियोजना 2022 में सौंपी गई थी. पहले कैबिनेट सचिवालय राष्ट्रपति भवन परिसर से और एनएससीएस सरदार पटेल भवन से संचालित होते थे, जिन्हें अब एकीकृत किया जा रहा है. इससे प्रशासनिक कामकाज में तेजी और समन्वय बढ़ने की उम्मीद है.
नाम बदलने की परंपरा और प्रतीकात्मकता
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में नाम बदलने को भी एक प्रतीकात्मक संदेश के तौर पर देखा गया है. 2016 में रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया, फिर राजपथ को कर्तव्य पथ नाम दिया गया. अब केंद्रीय सचिवालय के नए परिसरों को ‘कर्तव्य भवन’ नाम दिया गया है. सेवा तीर्थ में पीएमओ का जाना इसी सोच की अगली कड़ी माना जा रहा है, जहां सत्ता के साथ सेवा और दायित्व का संदेश जुड़ा है.
















