नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद अंतर्गत मुरादनगर थाना क्षेत्र में जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. पुलिस और स्वॉट टीम की संयुक्त छापेमारी में लिवर की सुरक्षा के लिए उपयोग की जाने वाली Liv-52 दवा की हजारों नकली टैबलेट बरामद की गई हैं. एक प्रतिष्ठित दवा कंपनी की शिकायत पर शुरू हुई इस जांच ने बाजार में फैले एक खतरनाक सिंडिकेट को उजागर किया है. आरोपी जाली दस्तावेजों और फर्जी लाइसेंस के सहारे लोगों की जान जोखिम में डाल रहे थे.
डीसीपी ग्रामीण जोन सुरेंद्र नाथ तिवारी के नेतृत्व में मुरादनगर पुलिस और स्वॉट टीम ने इस संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला. मुखबिर की सटीक सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मयंक अग्रवाल, अनुप गर्ग, तुषार ठाकुर, आकाश ठाकुर और नितिन त्यागी को रंगे हाथों पकड़ने (Arrest) में सफलता हासिल की. इन आरोपियों के पास से 50 हजार नकली दवाइयां और एक कार बरामद की गई है. यह गिरोह पुलिस के लिए लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ था.
फर्जी दस्तावेजों का सुनियोजित मायाजाल
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों और नकली जीएसटी नंबरों का सहारा ले रहे थे. उन्होंने जाली औषधि लाइसेंस भी बना रखे थे ताकि वितरकों को गुमराह किया जा सके. प्रतिष्ठित दवा कंपनी की शिकायत के अनुसार, ये नकली उत्पाद ट्रांसपोर्ट के जरिए देश के विभिन्न कोनों में भेजे जा रहे थे. पुलिस अब इन जाली दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है ताकि न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ ठोस साक्ष्य (Testify) पेश किए जा सकें और उन्हें कड़ी सजा दिलाई जा सके.
कम लागत और अवैध मुनाफे का खेल
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि लालच ने उन्हें इस अपराध के रास्ते पर धकेला. नकली टैबलेट तैयार करने की लागत बेहद कम थी, जो प्रति डिब्बी केवल 35 से 40 रुपये बैठती थी. इसे बाजार में 100 रुपये में बेचकर वे मोटा मुनाफा कमा रहे थे. टैबलेट्स को बाहरी प्रयोगशालाओं में चोरी-छिपे तैयार कराया जाता था और फिर उन्हें एक गुप्त स्थान पर एकत्रित कर पैक किया जाता था. यह गिरोह बहुत ही शातिर और सुनियोजित ढंग से लंबे समय से सक्रिय था.
पुलिस ने अब पकड़े गए सभी संदिग्धों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस दवा की दुकानों पर कड़ी निगरानी रख रही है. कानून और नियम (Niyam) का उल्लंघन करने वालों के लिए यह कार्रवाई एक बड़ी चेतावनी है. समाज में पुलिस की इस तत्परता की काफी सराहना हो रही है. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे अन्य संभावित सूत्रों (Clue) की तलाश में जुटी है ताकि इस सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके.















