क्या पुतिन ईरान को धोखा देने की बना रहे योजना? रूस की ओर से ट्रंप को मिले तगड़े ऑफर

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रही दुश्मनी के बीच इज़राइल और अमेरिका ने ईरान को निशाना बनाने के लिए हाथ मिला लिया है. हालांकि ईरान अकेले लड़ता हुआ दिख रहा है लेकिन रूस और चीन से उसे जो गुपचुप मदद मिल रही है, वह अब सामने आ गई है. दोनों देश ईरान को अमेरिकी और इजराइली हथियारों के साथ-साथ रणनीतिक ऑपरेशनल योजनाओं के बारे में बारीक जानकारियां मुहैया करा रहे हैं. हालांकि, पुतिन अब ईरान से मुंह मोड़ने को तैयार हैं. 

उनकी तरफ से ट्रंप को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें संकेत दिया गया है कि रूस ईरान के साथ अपने गठबंधन की कुर्बानी देने को तैयार है. बशर्ते अमेरिका एक खास शर्त पूरी करने पर राजी हो जाए.

क्या है पुतिन का ‘मास्टरस्ट्रोक’?

रूस के दूत, किरिल दिमित्रीव ने मियामी में ट्रंप के दो अहम सलाहकारों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान पुतिन का संदेश देते हुए यह बात कही गई कि अगर अमेरिका यूक्रेन को रूसी सेना की गतिविधियों के बारे में मदद, हथियार और जानकारी देना बंद कर देता है, तो रूस भी बदले में ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों के सटीक निर्देशांक देना बंद कर देगा.

अब तक, रूस अपने सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल करके ईरान को उन खास जगहों के बारे में जानकारी देता रहा है जहां मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना के जहाज और जमीनी सेना तैनात हैं. साथ ही उनके हमलों के लिए तय किए गए शुरुआती बिंदुओं के बारे में भी जिससे ईरान को हमले करने में आसानी होती थी. पुतिन अब इसी जानकारी को एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करके ट्रंप के साथ कोई सौदा करना चाहते हैं. 

ट्रंप प्रशासन ने क्या दिया रिएक्शन?

ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है; हालांकि, इस पर हुई चर्चा मात्र से ही यूरोपीय और ईरानी ​​दोनों खेमों में बेचैनी फैल गई है. यूरोप को डर है कि पुतिन, अमेरिका को अपनी तरफ मिलाकर, NATO को असल में हाशिए पर धकेल देंगे. 

मोजतबा के लिए क्यों है चिंता का विषय? 

मोजतबा खामेनेई के लिए जिन्हें ईरान में सत्ता का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता है. यह एक गहरे विश्वासघात से कम नहीं है. अब तक ईरान रूस को ड्रोन और मिसाइलें इस उम्मीद में दे रहा था कि रूस उसके लिए एक अंतिम सुरक्षा कवच का काम करेगा. हालांकि पुतिन के हालिया प्रस्ताव से यह पूरी तरह साफ हो गया है कि रूस के लिए, उसके अपने राष्ट्रीय हित ही सबसे ज्यादा मायने रखते हैं. अगर रूस खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर देता है, तो संभावित अमेरिकी हमलों के सामने ईरान पूरी तरह से अंधा रह जाएगा.

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