राजस्थान में श्रमिकों का संकट, मतदाता सूची से नाम कटने के डर से पलायन कर रहे बंगाली मजदूर

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जयपुर: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए वोटिंग 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होनी है. हालांकि चुनाव बंगाल में हो रहे हैं लेकिन राजस्थान में हलचल मच गई है. इसकी वजह यह है कि बंगाल के लोग जो राजस्थान के अलग-अलग जिलों में मजदूर के तौर पर काम करते हैं. उन्होंने घर लौटना शुरू कर दिया है.

इन प्रवासी मजदूरों के लौटने से राज्य के उद्योगों में मजदूरों का संकट खड़ा हो गया है. राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में बंगाल के लगभग 2,50,000 मजदूर काम करते हैं, जबकि लगभग 1,00,000 मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं.

बंगाली मजदूरों को किस बात का है डर?

बंगाली मजदूरों के बीच एक गुमराह करने वाला मैसेज फैल रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि अगर वे इस विधानसभा चुनाव में वोट नहीं डालते हैं, तो उनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए जाएंगे. इसके अलावा उन्हें डर है कि उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा.

यही मुख्य वजह है कि ये मज़दूर अपने गृह राज्य लौट रहे हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि बंगाल जाने वाली ट्रेनों में टिकट मिलना बहुत मुश्किल हो गया है. जिसके वजह से कई मजदूर सड़क के रास्ते पश्चिम बंगाल जा रहे हैं.

मजदूरों का क्या है कहना?

मजदूरों का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया के दौरान राजस्थान सहित दूसरे राज्यों में रहने वाले कई लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे. अब उन्हें यह डर सता रहा है कि अगर वे इस बार वोट नहीं डालेंगे तो उनके नाम एक बार फिर वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं.

जयपुर बुलियन ट्रेडर्स कमेटी के अध्यक्ष कैलाश मित्तल बताते हैं कि लगभग 1,00,000 बंगाली मजदूर गहने बनाने और उससे जुड़े कामों में लगे हुए हैं. पिछले दो हफ्ते से मजदूरों के बंगाल लौटने का सिलसिला जारी है.

प्रवासी बंगाली सांस्कृतिक समिति के सचिव रॉबिन सरकार ने बताया कि बंगाली समुदाय के सदस्यों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित करने के लिए फिलहाल प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस संबंध में वे सरकार से सहायता लेने का भी इरादा रखते हैं.

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