नई दिल्ली: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच लेबनान पर इजरायल के हमले को तीखा आड़े हाथों लिया है. आसिफ ने इजरायल को बुरा और मानवता के लिए अभिशाप करार देते हुए कहा कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय शांति के लिए बेहद खतरनाक है. इस बयान पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. नेतन्याहू ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान को पूरी तरह से अस्वीकार करते हुए उसे एकतरफा और तथ्यों से दूर बताया है.
‘इस्लामाबाद में शांति वार्ता’
गुरुवार को X पर एक पोस्ट में आसिफ ने दावा किया कि ‘इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, वहीं लेबनान में नरसंहार हो रहा है ‘. उन्होंने लिखा, ‘इजराइल द्वारा निर्दोष नागरिकों को मारा जा रहा है, पहले गाजा में, फिर ईरान में और अब लेबनान में, रक्तपात लगातार जारी है.’
🇵🇰🇮🇷|Pakistan’s Minister of Defense, H.E KHAWAJA MUHAMMAD ASIF: pic.twitter.com/Yl7bV2p1yu— Aprajita Nafs Nefes 🦋 Ancient Believer (@aprajitanefes) April 9, 2026
आसिफ ने आगे कहा ‘मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनी भूमि पर इस कैंसर जैसे राज्य का निर्माण किया, वे नरक में जलें,’ .
नेतन्याहू का पलटवार
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के विनाश के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का आह्वान ‘बेहद निंदनीय’ है.
उनके कार्यालय ने X पर पोस्ट किया ‘यह ऐसा बयान नहीं है जिसे किसी भी सरकार से बर्दाश्त किया जा सकता है, खासकर ऐसी सरकार से जो शांति के लिए एक निष्पक्ष मध्यस्थ होने का दावा करती है,’ .
The Prime Minister’s Office:
Pakistan Defence Minister’s call for Israel’s annihilation is outrageous. This is not a statement that can be tolerated from any government, especially not from one that claims to be a neutral arbiter for peace.— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) April 9, 2026
पाकिस्तान की आलोचना
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सा’आर ने भी सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के नेतृत्व की आलोचना की, जो औपचारिक संबंध न रखने वाले दो देशों के बीच एक दुर्लभ प्रत्यक्ष राजनयिक टकराव का प्रतीक है.
साआर ने इसे ‘स्पष्ट यहूदी-विरोधी रक्त-आलोचना’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और चेतावनी दी कि इज़राइल को “कैंसर” कहना प्रभावी रूप से उसके विनाश का आह्वान करना है. उन्होंने कहा कि इज़राइल ‘उसे नष्ट करने की कसम खाने वाले आतंकवादियों के खिलाफ अपनी रक्षा करेगा’, जिससे यह स्पष्ट होता है कि तेल अवीव इस्लामाबाद से निकलने वाली बयानबाजी को कितनी गंभीरता से लेता है.
Israel views very gravely these blatant antisemitic blood libels from a government claiming to “mediate peace”.
Calling the Jewish state “cancerous” is effectively calling for its annihilation.
Israel will defend itself against terrorists who vow its destruction. https://t.co/CCMveNi9Qu— Gideon Sa’ar | גדעון סער (@gidonsaar) April 9, 2026
इजरायल की यह प्रतिक्रिया कई घटनाक्रमों के बाद आई है, जिसकी शुरुआत पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय द्वारा लेबनान में इजरायली सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा करने से हुई . इसके बाद ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ टिप्पणियां कीं.
इजरायली नेता का सार्वजनिक रूप से जवाब देने का निर्णय अतीत की प्रथा से एक उल्लेखनीय विचलन का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि राजनयिक संबंधों के अभाव में तेल अवीव ने ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान के साथ प्रत्यक्ष जुड़ाव से परहेज किया है.
इजराइल-लेबनान संघर्ष
2 मार्च को लेबनान मध्य पूर्व युद्ध में तब घसीटा गया जब ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने युद्ध के पहले दिन मारे गए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के लिए इजरायली शहरों की ओर रॉकेट दागे.
हिजबुल्लाह के युद्ध में शामिल होने के बाद से इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए सबसे भीषण हमलों में बुधवार को सैकड़ों लोग मारे गए, जिससे वाशिंगटन और तेहरान के बीच लागू हुई अस्थिर शांति संधि को लागू होने के 48 घंटे से भी कम समय में ही झटका लगा.
















