नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की नई पाठ्यपुस्तकों में किए जा रहे बदलाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं. कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में इस बार मनुस्मृति के एक प्रसिद्ध श्लोक का उल्लेख किया गया है.
किताब में इस श्लोक के जरिए यह समझाने की कोशिश की गई है कि वैदिक काल में महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त था. हालांकि इस बदलाव को लेकर नई बहस शुरू होने की संभावना भी जताई जा रही है.
किताब में शामिल किया गया प्रसिद्ध श्लोक
नई पुस्तक में “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” श्लोक का उल्लेख किया गया है. इसका अर्थ है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास माना जाता है. किताब में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि यह श्लोक मनुस्मृति से लिया गया है और इसे प्राचीन भारतीय समाज में महिलाओं के सम्मान के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है.
‘भारत और विश्व’ अध्याय में वैदिक काल का जिक्र
यह सामग्री ‘भारत और विश्व’ नामक अध्याय में शामिल की गई है. अध्याय में बताया गया है कि वैदिक काल में महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार था. वे सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेती थीं तथा कई मामलों में अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता भी रखती थीं. पुस्तक में उस दौर में महिलाओं की भूमिका और अधिकारों को विस्तार से समझाने का प्रयास किया गया
समय के साथ बदली महिलाओं की स्थिति
किताब केवल वैदिक काल की सकारात्मक तस्वीर ही नहीं दिखाती, बल्कि यह भी बताती है कि समय बीतने के साथ महिलाओं की सामाजिक स्थिति में बदलाव आया. कई अधिकार सीमित हुए और समाज में उनकी भूमिका पहले जैसी नहीं रही. इस तरह पुस्तक में दोनों पक्षों को सामने रखने की कोशिश की गई है.
पहले भी हो चुका है विवाद
हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी में मनुस्मृति को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया था, जिस पर काफी विवाद हुआ. विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस प्रस्ताव को वापस ले लिया था. ऐसे में अब NCERT की स्कूली किताब में मनुस्मृति का उल्लेख शामिल होने के बाद इस विषय पर नई चर्चा और बहस शुरू होने की संभावना जताई जा रही है.
















