नई दिल्ली: बांग्लादेश को लेकर हाल के दिनों में कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं. इसी बीच भारत के पूर्व रॉ (RAW) अधिकारी लकी बिष्ट के कुछ दावों ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए बांग्लादेश के भीतर कथित आतंकी गतिविधियों और भारत की सुरक्षा पर संभावित खतरे को लेकर गंभीर बातें कही हैं. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद उनके बयान ने सुरक्षा मामलों को लेकर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
पूर्व रॉ अधिकारी लकी बिष्ट ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान मुख्य रूप से बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति और वहां के नेतृत्व के विदेशी संबंधों पर है. उनका दावा है कि इसके बीच देश के भीतर कथित आतंकी गतिविधियों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि बांग्लादेश की वास्तविक स्थिति दिखाई देने वाली तस्वीर से कहीं अधिक गंभीर हो सकती है. उनके अनुसार, कुछ ऐसे घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान रहना जरूरी है.
13 कथित आतंकी कैंप और 174 लोगों का दावा
लकी बिष्ट ने अपने पोस्ट में दावा किया कि बांग्लादेश में कुल 13 कथित आतंकी कैंप सक्रिय हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 174 ऐसे लोगों को जेल से रिहा किया गया है, जिनके आतंकी गतिविधियों से जुड़े होने का आरोप रहा है. उनके मुताबिक, यदि ये दावे सही साबित होते हैं, तो इससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. हालांकि, इन आंकड़ों की पुष्टि किसी आधिकारिक सरकारी एजेंसी या स्वतंत्र स्रोत द्वारा नहीं की गई है.
किन इलाकों का किया गया जिक्र?
पूर्व रॉ अधिकारी ने अपने दावों में बांग्लादेश के पांच क्षेत्रों का उल्लेख किया है, जहां कथित तौर पर ऐसे कैंप मौजूद होने की बात कही गई है.
रंगपुर: उन्होंने दावा किया कि रंगपुर क्षेत्र में दो कथित कैंप सक्रिय हैं. यह इलाका भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब होने के कारण संवेदनशील माना जाता है.
चटगांव हिल ट्रैक्ट्स: उनके अनुसार, इस क्षेत्र में तीन कथित कैंप मौजूद हैं. उन्होंने दावा किया कि यहां कुछ ऐसे आतंकी संगठनों से जुड़े तत्व सक्रिय हो सकते हैं, जिनका नाम पहले भी भारत विरोधी गतिविधियों में सामने आता रहा है.
सिलहट: लकी बिष्ट ने सिलहट में चार कथित कैंप होने का दावा किया है. उनके अनुसार, यहां की गतिविधियां बेहद गोपनीय हैं और इस क्षेत्र को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है.
नेत्रोकोना: उन्होंने कहा कि इस इलाके में दो कथित कैंप संचालित होने की बात सामने आई है. उनके दावे के अनुसार, यहां कुछ कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण दिए जाने की आशंका है.
टंगाइल: पोस्ट में टंगाइल का भी उल्लेख किया गया है. उन्होंने दावा किया कि यहां दो कथित कैंप सक्रिय हैं और कुछ कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव इस क्षेत्र में देखा जा सकता है.
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
पूर्व रॉ अधिकारी के इन दावों ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा शुरू कर दी है. हालांकि, इन दावों की अभी तक भारत सरकार, बांग्लादेश सरकार या किसी आधिकारिक सुरक्षा एजेंसी की ओर से पुष्टि नहीं की गई है. ऐसे मामलों में सुरक्षा से जुड़ी जानकारी का सत्यापन संबंधित एजेंसियों द्वारा ही किया जाता है.












