E20 विवाद के बीच वायरल हुआ मणिशंकर अय्यर का पुराना बयान, ‘शराब कम पियो’ वाली सलाह ने मचा दी हलचल

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Mani Shankar Aiyar
Mani Shankar Aiyar

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर बहस तेज हो गई है. एक ओर सरकार इसे ईंधन आयात कम करने और प्रदूषण घटाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ वाहन मालिक इस ईंधन से गाड़ियों पर असर पड़ने की चिंता जता रहे हैं. इसी विवाद के बीच पूर्व पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर का करीब 22 साल पुराना संसद का भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

क्यों वायरल हो रहा है पुराना वीडियो?

वायरल वीडियो वर्ष 2005 का बताया जा रहा है. उस समय संसद में बोलते हुए मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की योजना को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि “पहले शराब कम पीजिए, क्योंकि एथेनॉल का बड़ा हिस्सा वहीं चला जाता है. जो बचेगा, उसका इस्तेमाल पेट्रोल में होगा।” यही बयान अब सोशल मीडिया पर फिर चर्चा का विषय बना हुआ है.

E20 ईंधन पर क्यों हो रही बहस?

केंद्र सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाकर विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण घटाना है. हालांकि, कुछ लोगों का दावा है कि अधिक एथेनॉल मिश्रण से पुरानी गाड़ियों के इंजन और फ्यूल सिस्टम पर असर पड़ सकता है. हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें वाहनों को नुकसान होने के दावे किए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

एथेनॉल नीति से जुड़ा मामला अब सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच गया है. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि E20 कार्यक्रम अभी परीक्षण और मूल्यांकन के चरण में है. सरकार का कहना है कि इस नीति के प्रभाव का स्पष्ट आकलन अगले वर्ष तक सामने आएगा.

सरकार का फोकस वैकल्पिक ईंधन पर

इसी बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि भविष्य में हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रक और बसें भी देश की सड़कों पर नजर आएंगी. उन्होंने बताया कि सरकार इलेक्ट्रिक, फ्लेक्स-फ्यूल और हाइड्रोजन जैसे स्वच्छ ईंधनों को बढ़ावा दे रही है, ताकि प्रदूषण कम हो और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटे.

फिलहाल एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर बहस अभी जारी है. आने वाले समय में सरकार की नीति, वाहन कंपनियों के सुझाव और वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर इस योजना की दिशा और प्रभाव अधिक स्पष्ट हो सकेगा.

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