‘जंग के बिना US का मन नहीं लगता’, ईरान का तंज, बहरीन-कतर-कुवैत में पलटवार का दावा

0
12
Iran USA military conflict Bahrain attack Strait of Hormuz
Iran USA military conflict Bahrain attack Strait of Hormuz

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है. दोनों देशों के बीच न केवल सैन्य कार्रवाई तेज हो गई है, बल्कि बयानबाजी भी लगातार तीखी होती जा रही है. इसी बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए दावा किया है कि उसके जवाबी अभियान के दूसरे चरण में बहरीन स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया है. 

IRGC ने जारी किया बयान 

IRGC ने एक बयान जारी कर अमेरिका को लड़ाकू कहते हुए कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने अपने इतिहास में शायद ही ऐसा कोई दौर देखा हो, जब वह युद्ध और सैन्य हस्तक्षेप से दूर रहा हो. संगठन का आरोप है कि हालिया संघर्ष में मिली असफलताओं के बावजूद अमेरिका अपनी आक्रामक नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं है और लगातार सैन्य दबाव बनाए हुए है.

अमेरिकी सैन्य अड्डे को बनाया गया निशाना 

ईरान का दावा है कि जवाबी कार्रवाई के दूसरे चरण में उसकी एयरोस्पेस यूनिट ने बहरीन स्थित शेख ईसा अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। तेहरान के अनुसार, इस हमले में अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टर मरम्मत एवं रखरखाव केंद्र, पी-8 इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान के हैंगर और ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और अमेरिका की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

जॉर्डन और कुवैत में मौजूद ठिकानों को भी बनाया निशाना 

ईरान ने यह भी कहा कि इससे पहले जवाबी कार्रवाई के पहले चरण में उसने जॉर्डन, कुवैत, ओमान और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया था. ईरानी पक्ष के अनुसार, जॉर्डन में अमेरिकी कमांड सेंटर, कुवैत में HIMARS मिसाइल लॉन्चर सिस्टम, ओमान में एयरक्राफ्ट कैरियर सपोर्ट प्लेटफॉर्म और कतर में जेट मेंटेनेंस सेंटर पर हमले किए गए थे.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी बढ़ा तनाव 

उधर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है. ईरानी नौसेना ने दावा किया कि उसने विशेष अभियान के दौरान दो ऐसे जहाजों को रोका, जिन्होंने कथित तौर पर अपने पहचान संबंधी सिस्टम बंद कर दिए थे. ईरान का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं. वहीं लगातार बढ़ते सैन्य हमलों और तीखी बयानबाजी के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच यह टकराव आगे किस दिशा में बढ़ता है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here