नई दिल्ली: मध्यपूर्व के बिगड़ते हालातों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान रणनीति पर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते घमासान के बीच ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को ईरान मामले में कोई जल्दबाजी नहीं है, लेकिन वाशिंगटन की अंतिम शर्तें बिल्कुल तय हैं। विश्व व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस जलमार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस पूरी दुनिया में सप्लाई होती है, जिस पर कब्जा जमाने को लेकर दोनों देश अड़े हुए हैं। अमेरिकी प्रशासन और ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ के शीर्ष अधिकारियों के बीच गुप्त कूटनीतिक संवाद लगातार जारी है।
पर्दे के पीछे वार्ता और तेहरान पर बढ़ता दबाव
फॉक्स न्यूज के साथ एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि खुले मंचों पर जारी बयानबाजी के बावजूद पर्दे के पीछे बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं।
ट्रंप का मानना है कि तेहरान सार्वजनिक रूप से खुद को मजबूत और आक्रामक दिखाने की कोशिश जरूर कर रहा है, लेकिन हकीकत में ईरान अंदरूनी आर्थिक और राजनीतिक दबावों से बुरी तरह घिर चुका है।
ओमान को आक्रामक चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब ट्रंप ने खाड़ी देश ओमान को लेकर बेहद तल्ख रवैया अपनाया। ऐतिहासिक रूप से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला ओमान इन दिनों तेहरान के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए नए जहाजरानी मार्गों पर चर्चा कर रहा है। इसी बातचीत पर सख्त एतराज जताते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ओमान ने अमेरिका के सैन्य व आर्थिक अभियानों के रास्ते में रुकावट डालने की कोशिश की, तो उस पर भीषण बमबारी की जाएगी।
होर्मुज की जंग और परमाणु संकल्प
विश्व व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस जलमार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस पूरी दुनिया में सप्लाई होती है, जिस पर कब्जा जमाने को लेकर दोनों देश अड़े हुए हैं। ट्रंप ने तो यहां तक इरादा जताया है कि वे इस रणनीतिक क्षेत्र को अमेरिकी नियंत्रण वाला इलाका घोषित कर सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, परमाणु मुद्दे पर अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिर दोहराया कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। यह उनकी विदेश नीति का सबसे प्राथमिक और अंतिम उद्देश्य है।












