कौन था झारखंड में क्रैश हुई एयर एम्बुलेंस का पायलट? जानें गांव में रहने वाला लड़का कैसे बना कैप्टन

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चतरा: इस सोमवार को झारखंड के चतरा जिले में हुए भयानक एयर एम्बुलेंस क्रैश में जान गंवाने वाले सात लोगों में एक होनहार युवा पायलट भी शामिल था. झारखंड के लातेहार जिले के लुटी गांव के रहने वाले कैप्टन विवेक विकास भगत उस दुर्भाग्यपूर्ण एयरक्राफ्ट को उड़ा रहे थे जब वह क्रैश हो गया.

इस क्रैश से उनके गांव और जिले में गहरा शोक छा गया. उन्हें 27 फरवरी को एक करीबी दोस्त की सगाई में भी शामिल होना था. हालांकि उससे कुछ दिन पहले ही यह हादसा हो गया. विवेक अपने पिता देव सहाय भगत का इकलौते बेटे थे. उनके पिता रूरल वर्क्स डिपार्टमेंट में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के तौर पर काम करते थे. परिवार और गांव वालों ने विवेक को एक टैलेंटेड, विनम्र और जमीन से जुड़ा हुआ लड़का बताया. 

कैसा रहा कैप्टन विवेक भगत का प्रोफेशनल सफर?

विवेक के कैप्टन के पद पर प्रमोशन के मुश्किल से छह महीने बाद ही प्लेन क्रैश हो गया. उन्होंने अपनी कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 2022 में रेडबर्ड एविएशन जो उस दुर्भाग्यपूर्ण एयर एम्बुलेंस को ऑपरेट करने वाली प्राइवेट एविएशन कंपनी थी जॉइन किया था.

उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई रांची के सेंट थॉमस स्कूल में की. इसके बाद विवेक ने अपनी स्कूली पढ़ाई के सीनियर सेकेंडरी स्टेज के दौरान आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में चैतन्य एकेडमी में पढ़ाई की. उन्होंने कानपुर में शुरुआती पायलट ट्रेनिंग ली और बाद में साउथ अफ्रीका में एडवांस्ड ट्रेनिंग पूरी की.

दोस्तों ने क्या बताया?

दोस्तों का कहना है कि अपनी प्रोफेशनल सफलता के बावजूद विवेक अपने गांव से बहुत जुड़े रहे. उनके बचपन के दोस्त उदय नारायण ने कहा कि विवेक जब भी समय मिलता घर लौट आते थे और हमेशा पुराने दोस्तों के साथ कुछ पल बिताने के लिए उत्सुक रहते थे. विवेक को उदय की सगाई में शामिल होने के लिए 27 फरवरी को रांची जाना था. उन्होंने इस मौके के लिए 1 मार्च तक छुट्टी के लिए भी अप्लाई किया था.

पंडुका गांव के रहने वाले विवेक का रांची में भी घर था. उनके परिवार में उनकी छोटी बहन अनु अभिलाषा भगत हैं, जो मेडिकल की स्टूडेंट हैं.

मंत्री बैद्यनाथ राम ने उनके परिवार से की मुलाकात?

हादसे के बाद पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम ने उनके पैतृक गांव में दुखी परिवार से मुलाकात की. इस घटना को बहुत दर्दनाक बताते हुए उन्होंने कहा कि पूरा परिवार पढ़ा-लिखा है और दूर-दराज के इलाके में रहने के बावजूद कामयाबी हासिल करके इलाके का नाम रोशन किया है. लातेहार के लिए विवेक सिर्फ एक पायलट से कहीं ज्यादा थे.

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