अंकिता भंडारी केस में CBI जांच को हरी झंडी, धामी सरकार का बड़ा फैसला; मानी माता-पिता की मांग

अंकिता भंडारी हत्याकांड में बढ़ते जनआक्रोश के बीच उत्तराखंड सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है. विपक्ष इसे दबाव की जीत बता रहा है, जबकि कई सवाल अब भी अनुत्तरित बने हुए हैं.

0
14
Ankita Bhandari Case CBI Probe Approved
Ankita Bhandari Case CBI Probe Approved

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति और सड़कों पर चर्चा का केंद्र बन गया है. राज्यभर में विरोध प्रदर्शन तेज होने और विपक्षी दलों के दबाव के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है. यह फैसला अंकिता के माता-पिता से मुलाकात के ठीक अगले दिन लिया गया. हालांकि जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाने के बाद भी राजनीतिक बहस और सवाल थमते नहीं दिख रहे हैं.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर बड़ा फैसला लिया है. सरकार का कहना है कि अब जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होगी. सीएम धामी ने इससे पहले अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर उनकी बातों को गंभीरता से सुनने का भरोसा दिया था. सरकार का दावा है कि यह निर्णय पीड़ित परिवार की मांग और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है.

विपक्ष का दबाव और 11 जनवरी का बंद

इस फैसले से पहले विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया था. कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का कहना है कि शुरुआती जांच में कई अहम पहलुओं को नजरअंदाज किया गया. सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने सीबीआई जांच को ही न्याय की पहली सीढ़ी बताया. बंद के आह्वान ने सरकार पर दबाव और तेज कर दिया था.

कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल

सीबीआई जांच की घोषणा के बाद भी कांग्रेस का हमला जारी है. पार्टी प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने सवाल उठाया कि जिस वीआईपी का नाम बार-बार सामने आया, उसकी पहचान अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई. उन्होंने यह भी पूछा कि घटना वाली रात रिजॉर्ट पर बुलडोजर किसके आदेश पर चला. कांग्रेस का कहना है कि जब तक इन सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिलते, तब तक न्याय अधूरा रहेगा.

सरकार का बचाव, बीजेपी का पलटवार

उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मुख्यमंत्री के फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि सीएम धामी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए माता-पिता से किया वादा निभाया है. भट्ट ने यह भी कहा कि मामले के तीनों आरोपी जेल में हैं और जांच अब सीबीआई के हाथ में है. उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि जांच को प्रभावित करने वाले बयान देने से बचा जाए.

वीआईपी विवाद और पुराने सवाल

यह मामला 2025 के अंत में फिर चर्चा में आया, जब एक कथित वीआईपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपने नाम से जुड़ी चर्चाएं हटाने की मांग की. उस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा था कि घटना के समय वह नेता उत्तराखंड में मौजूद नहीं था. इसके बावजूद वीआईपी की भूमिका को लेकर संदेह बना हुआ है. अब सबकी नजर सीबीआई जांच पर टिकी है, जिससे सच्चाई सामने आने की उम्मीद की जा रही है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here