एपस्टीन फाइल्स में डोनाल्ड ट्रंप का ‘नोबेल प्रेम’, शक के दायरे में नोबेल समिति

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Donald Trump
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एपस्टीन फाइल इन दिनों चर्चे में है. जेफ्री की इस विवादास्पद फाइलों को देख पूरी दुनिया हैरान है. इसमें डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के कई बड़े नेताओं के नाम का जिक्र है. इन दस्तावेजों में अमेरिकी राष्ट्रपति के नोबेल शांति पुरस्कार के प्रति गहरे लगाव का जिक्र किया गया है.

डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से खुद को नोबेल शांति पुरस्कार के सबसे योग्य उम्मीदवार मानते हैं. इस  बार भी उन्होंने दुनिया के कई युद्धों को शांत करवाने का दावा करते हुए इस पर अपना हक बताया. हालांकि बाद में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को इस पुरस्कार से नवाजा गया. लेकिन इसी बीच एपस्टीन फाइल्स में इस बात का जिक्र आया है.

एपस्टीन के ईमेल में हुआ खुलासा 

एपस्टीन फाइल्स में एक ईमेल सामने आया है. जिसमें जेफ्री, ट्रंप के एक  करीबी सहोयगी को लिखता है कि अगर ट्रंप को पता चले कि नोबेल समिति का चेयरमैन उनके आसपास है, तो उनका सिर फट जाएगा. फाइलों से पता चलता है कि एपस्टीन ने नोबेल शांति पुरस्कार समिति के चेयरमैन रहे थॉरबोर्न यागलैंड से गहरे संबंध बनाए थे. नॉर्वे के एक राजनयिक ने इन दोनों को एक-दूसरे से मिलवाया था.

यागलैंड का नाम इन फाइलों में हजारों बार आया है. हालांकि, अभी तक किसी पुरस्कार के लिए लॉबिंग का सीधा सबूत नहीं मिला, लेकिन एपस्टीन ने इस दोस्ती का फायदा उठाकर कई बड़े नामों से जुड़ने की कोशिश की. 

एपस्टीन ने यागलैंड के नाम का किया इस्तेमाल?

एपस्टीन ने ट्रंप के करीबी स्टीव बैनन को 2018 में एक ईमेल भेजा था. जिसमें यागलैंड का जिक्र करते हुए लिखा कि डोनाल्ड का सिर फट जाएगा अगर उसे पता चले कि तुम अब उस शख्स के दोस्त हो, जो सोमवार को नोबेल शांति पुरस्कार का फैसला करेगा. एपस्टीन ने यागलैंड के नाम का इस्तेमाल कई लोगों को अपनी ओर खींचने के लिए किया. एपस्टीन ने व्हाइट हाउस की पूर्व कानूनी सलाहकार कैथी रूमलर को लिखा कि नोबेल शांति पुरस्कार के प्रमुख मिलने आ रहे हैं, क्या आप जुड़ना चाहेंगी?

इसी तरह हार्वर्ड के पूर्व अध्यक्ष और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी रहे लैरी समर्स को भी आमंत्रित किया गया. हालांकि आपको याद दिला दें कि यागलैंड के चेयरमैन रहते 2009 में बराक ओबामा और 2012 में यूरोपीय संघ को नोबेल शांति पुरस्कार मिला था. अब इन फाइलों के सामने आने के बाद यागलैंड के खिलाफ कई सवाल उठने लगे है. नॉर्वे की आर्थिक अपराध जांच इकाई ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है. 

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