हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों को झटका! अब 58 साल में ही होगा रिटायरमेंट, इन्हें मिलेगी 60 साल तक की नौकरी

हरियाणा सरकार ने रिटायरमेंट नियमों में बदलाव किया है. अब अधिकांश कर्मचारी 58 वर्ष में रिटायर होंगे. केवल दिव्यांग, नेत्रहीन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष तक सेवा कर सकेंगे.

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हरियाणा में सरकारी नौकरी करने वालों के लिए रिटायरमेंट से जुड़ा बड़ा बदलाव किया गया है. राज्य सरकार ने सेवानिवृत्ति की आयु को लेकर नियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब सभी कर्मचारियों को समान रूप से 60 वर्ष तक सेवा का लाभ नहीं मिलेगा. इस फैसले से हजारों कर्मचारियों की सेवा अवधि प्रभावित होगी. वित्त विभाग ने इस संबंध में विस्तृत आदेश जारी कर सभी विभागों को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं.

सेवानिवृत्ति आयु में बड़ा बदलाव

हरियाणा सरकार के नए नियमों के अनुसार अब अधिकांश सरकारी कर्मचारी 58 वर्ष की आयु पूरी करते ही सेवानिवृत्त माने जाएंगे. यह व्यवस्था सरकारी विभागों, बोर्ड-निगमों और सरकारी कंपनियों पर समान रूप से लागू होगी. पहले जिन कर्मचारियों को विशेष परिस्थितियों में सेवा विस्तार मिल जाता था, अब उनके लिए भी मंत्रिमंडल की स्वीकृति अनिवार्य कर दी गई है. बिना कैबिनेट मंजूरी किसी भी तरह का विस्तार नहीं दिया जाएगा.

किन कर्मचारियों को मिलेगी 60 साल तक सेवा

संशोधित नियमों में कुछ वर्गों को राहत दी गई है. 70 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांग कर्मचारी, नेत्रहीन कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और न्यायिक अधिकारी 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रह सकेंगे. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल एक आंख से दृष्टिहीन व्यक्ति को दिव्यांग या नेत्रहीन की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा.

सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया क्या होगी

नए नियमों के तहत कर्मचारी उस महीने के अंतिम दिन की दोपहर को सेवानिवृत्त माना जाएगा, जिस दिन वह निर्धारित आयु पूरी करेगा. यदि जन्मतिथि महीने के आखिरी दिन पड़ती है, तो उसी दिन दोपहर में रिटायरमेंट प्रभावी होगा. सेवानिवृत्ति से संबंधित कार्यालय आदेश संबंधित माह की सात तारीख तक जारी करना अनिवार्य होगा और उसकी प्रति प्रधान महालेखाकार को भेजी जाएगी.

दिव्यांगता की स्थिति में क्या करना होगा

सेवा के दौरान यदि कोई कर्मचारी दिव्यांग होता है और 60 वर्ष तक सेवा का दावा करता है, तो उसे 58 वर्ष की आयु से कम से कम तीन महीने पहले विभागाध्यक्ष को सूचना देनी होगी. इसके बाद रोहतक पीजीआईएमएस या चंडीगढ़ पीजीआईएमईआर के मेडिकल बोर्ड से जांच कराना अनिवार्य होगा. अंतिम फैसला नियुक्ति प्राधिकारी या विभागाध्यक्ष द्वारा लिया जाएगा.

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