NIA की बड़ी कार्रवाई, म्यांमार विद्रोहियों को ड्रोन ट्रेनिंग देने के आरोप में अमेरिकी नागरिक गिरफ्तार

अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनियों को एनआईए ने ड्रोन युद्ध प्रशिक्षण और म्यांमार में विद्रोही समूहों की मदद के आरोप में गिरफ्तार किया है. यह मामला भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गया है.

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NIA Arrests Matthew VanDyke
NIA Arrests Matthew VanDyke

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक सनसनीखेज अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. अमेरिकी सुरक्षा विश्लेषक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को कथित तौर पर म्यांमार के सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण देने के आरोप में पकड़ा गया है. यह समूह न केवल अवैध रूप से सीमा पार कर रहे थे, बल्कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के माध्यम से खतरनाक सैन्य उपकरण भी म्यांमार भेज रहे थे. इस गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं क्योंकि इसके तार सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हैं.

कौन है मैथ्यू वैनडाइक?

मैथ्यू वैनडाइक कोई साधारण व्यक्ति नहीं है. वह खुद को एक सुरक्षा विश्लेषक, युद्ध संवाददाता और डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माता बताता है. उसका नाम पहली बार 2011 के लीबिया गृहयुद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आया था, जब वह विद्रोहियों के साथ लड़ते हुए जेल गया था. बाद में उसने ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) नामक संगठन बनाया, जो दुनिया भर के संघर्ष क्षेत्रों में स्थानीय समूहों को सैन्य प्रशिक्षण और सामरिक सलाह देने का काम करता है.

कैसे हुई गिरफ्तारी? 

वैनडाइक को कोलकाता से हिरासत में लिया गया, जबकि तीन यूक्रेनी नागरिकों को लखनऊ और तीन अन्य को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया. इन सभी सात आरोपियों को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया. एनआईए ने साजिश की गहराई तक पहुंचने और अन्य साथियों का पता लगाने के लिए 15 दिनों की हिरासत मांगी थी. अदालत ने फिलहाल आरोपियों को 11 दिनों की एनआईए कस्टडी में भेज दिया है, जहां उनसे कड़ी पूछताछ जारी है.

ड्रोन और युद्ध प्रशिक्षण का खेल 

जांच में सामने आया है कि 14 यूक्रेनी नागरिक पर्यटक वीजा पर अलग-अलग समय पर भारत आए थे. ये लोग गुवाहाटी से मिजोरम पहुंचे और फिर बिना वैध दस्तावेजों के म्यांमार की सीमा पार कर गए. इनका मुख्य उद्देश्य म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों (EAGs) को ड्रोन युद्ध की तकनीक सिखाना था. इसके अलावा, यूरोप से ड्रोन की बड़ी खेप भारत के रास्ते म्यांमार भेजी गई थी, जिसका इस्तेमाल इन विद्रोही समूहों द्वारा किया जाना था.

राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा खतरा 

एनआईए के सूत्रों के अनुसार, म्यांमार में सक्रिय इन सशस्त्र समूहों के संबंध भारत में प्रतिबंधित संगठनों से भी हैं. आशंका जताई जा रही है कि ये समूह भारतीय विद्रोही गुटों को हथियार और प्रशिक्षण मुहैया करा रहे हैं, जो देश के पूर्वोत्तर राज्यों की शांति के लिए सीधा खतरा है. एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि क्या इस नेटवर्क को भारत के भीतर से भी कोई स्थानीय मदद मिल रही थी और ड्रोन का परिवहन कैसे हुआ?

भविष्य की जांच और चेतावनी 

जब्त किए गए मोबाइल फोनों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि इस साजिश के पूरे रूट का खुलासा हो सके. गौरतलब है कि मार्च 2025 में ही मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने चेतावनी दी थी कि अमेरिकी और ब्रिटिश सेना के पूर्व जवान और भाड़े के लड़ाके मिजोरम के रास्ते म्यांमार में घुस रहे हैं. एनआईए अब इन कड़ियों को जोड़कर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भारतीय जमीन का इस्तेमाल किसी भी अवैध गतिविधि के लिए न हो.

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