राज्यसभा के 37 सांसदों का कार्यकाल आज खत्म हो गया.इस खास मौके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों की तारीफ करते हुए भाषण दिया. वहीं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत तमाम नेताओं ने अपना विदाई भाषण दिया. विपक्ष के नेता का भाषण काफी भावुक और हास्य से भरा था. उनके इस भाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुस्कुराते नजर आए.
अपने भाषण की शुरुआत करते हुए खड़गे ने कहा कि विदाई का नाम आते ही मन भारी हो जाता है. समझ नहीं पा रहा हूं कि बात कहां से शुरू करूं. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाला व्यक्ति कभी रिटायर नहीं होता. वह कभी थकता भी नहीं है. उन्होंने कहा कि 54 सालों का संसदीय अनुभव है फिर आज भी सीखने की जरूरत महसूस हो रही है.
विदाई भाषण में देवगौड़ा का किया जिक्र
खड़गे ने अपने कार्यकाल से जुड़े खेट्टे-मीठे अनुभवों को साझा किया. उन्होंने कहा कि हर आदमी संपूर्ण ज्ञानी नहीं होता. उन्होंने कहा कि जो सदस्य जा रहे हैं, उनमें से कई फिर सदन में लौटेंगे. वे सदन को और बेहतर बनाने में योगदान देंगे. खड़गे ने उम्मीद जताई कि सभी सदस्य भविष्य में भी संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करेंगे.
उन्होंने अपने विदाई भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा का जिक्र किया. उन्होंने मजाकिया ढंग से कहा कि मैं 54 साल से देवगौड़ा जी को जानता हूं, पहले वे हमारे साथ थे. फिर हमसे दूर हो गए. इसके बाद उन्होंने जो कहा उसे सुन कर पूरा सदन हंसने लगा. उन्होंने कहा कि गौड़ा जी ने मोहब्बत हमारे साथ की और शादी मोदी जी से कर ली. खड़गे की इस टिप्पणी पर पीएम मोदी भी जोर से हंसते दिखे.
#WATCH दिल्ली | पूर्व प्रधानमंत्री और राज्यसभा सांसद, HD देवेगौड़ा के बारे में, कांग्रेस के नेशनल प्रेसिडेंट और राज्यसभा विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “…मैं देवेगौड़ा जी को 54 साल से ज़्यादा समय से जानता हूं और मैंने उनके साथ बहुत काम किया है। बाद में, मुझे नहीं पता… pic.twitter.com/0FBAhbTUmh— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 18, 2026
अठावले की खास शैली की तारीफ
मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने साथी सांसद रामदास अठावले की खास शैली की तारीफ की. उन्होंने कहा कि उनकी कविताएं अक्सर प्रधानमंत्री मोदी पर केंद्रित होती हैं. उन्होंने शक्ति सिंह गोहिल और नीरज डांगी की भी भावुक होकर प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि ज्वलंत मुद्दों पर उन्होंने पूरी तैयारी से बात रखी. उनके जाने से सदन में खालीपन महसूस होगा.
फूलोदेवी नेताम पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि वे कमजोर वर्ग की आवाज मजबूती से उठाती रहेंगी. उन्होंने कहा कि सदन को ऐसा सभापति मिले जो अच्छा व्यवहार और संयम रखे. जितना मिलकर काम करेंगे, उतना बेहतर होगा. दूरी बढ़ने से गलतफहमियां बढ़ती हैं. यह संसदीय प्रणाली के लिए ठीक नहीं. खड़गे ने सहयोग और संवाद की अपील की.
















