अमेरिका-ईरान वॉर के बीच भी पाकिस्तान का एंटी इंडिया राग जारी, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारतो लेकर क्या कहा?

ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत पर तीखा बयान दिया. उन्होंने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की स्थिति में भारत, अफगानिस्तान और ईरान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ हो सकते हैं.

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khwaja asif
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मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के बीच पाकिस्तान की सियासत ने एक बार फिर भारत का नाम उछाल दिया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर लंबा बयान जारी कर भारत पर निशाना साधा. उन्होंने आशंका जताई कि यदि ईरान में सत्ता परिवर्तन होता है तो भारत, अफगानिस्तान और ईरान का साझा एजेंडा पाकिस्तान के खिलाफ हो सकता है. इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

आसिफ का भारत पर आरोप

ख्वाजा आसिफ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि ‘जायोनिस्ट एजेंडा’ के तहत इजरायल का प्रभाव पाकिस्तान की सीमा तक लाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दावा किया कि ईरान समझौते को तैयार था, फिर भी उस पर युद्ध थोपा गया. आसिफ ने संकेत दिया कि अगर ईरान में नई व्यवस्था आती है तो भारत और अफगानिस्तान के साथ उसका रुख पाकिस्तान विरोधी हो सकता है.

तीन पड़ोसियों का ‘साझा एजेंडा’

आसिफ ने अपने बयान में कहा कि ईरान, भारत और अफगानिस्तान का ‘एकमात्र साझा एजेंडा’ पाकिस्तान से दुश्मनी हो सकता है. उनके मुताबिक इससे पाकिस्तान की सीमाएं असुरक्षित हो जाएंगी और देश चारों ओर से घिर जाएगा. उन्होंने 25 करोड़ पाकिस्तानियों से राजनीतिक और धार्मिक मतभेद भुलाकर कथित साजिश को समझने की अपील की.

अफगानिस्तान के साथ बढ़ता तनाव

इधर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी हालात तनावपूर्ण हैं. बीते सप्ताह दोनों देशों के बीच हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई का दौर चला. पाकिस्तान ने तालिबान ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, जबकि अफगान पक्ष ने इसे प्रतिशोध बताया. संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के अनुसार 26 फरवरी से 2 मार्च के बीच कम से कम 42 नागरिकों की मौत और 104 लोग घायल हुए हैं.

क्षेत्रीय संकट की गहराई

एक ओर ईरान को लेकर वैश्विक स्तर पर टकराव बढ़ रहा है, वहीं पाकिस्तान अपने उत्तरी और पश्चिमी मोर्चे पर भी दबाव झेल रहा है. ऐसे समय में भारत का नाम लेकर दिया गया बयान क्षेत्रीय राजनीति को और जटिल बना सकता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा हालात में संयम और कूटनीति ही स्थिरता का रास्ता हैं.

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