बिहार में फिर लौटेगी गन्ने की मिठास, बंद चीनी मिलें जल्द होंगी चालू; सीएम नीतीश का बड़ा फैसला

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार की बंद चीनी मिलों को पुनः शुरू करने का कड़ा निर्देश दिया है. इस पहल से किसानों की आय बढ़ेगी और रोजगार सृजित होंगे. साथ ही पंचायतों के लिए बड़ा फंड जारी हुआ है.

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CM Nitish Kumar and Sugar Mill.
CM Nitish Kumar and Sugar Mill.

पटना: बिहार के औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है. पटना के ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने राज्य की सभी बंद पड़ी चीनी मिलों को शीघ्र चालू करने का निर्देश दिया. यह निर्णय ‘7 निश्चय पार्ट-3’ के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ योजना को सफल बनाने के लिए लिया गया है. इस दूरगामी पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल औद्योगिक क्षेत्र को मजबूती देना है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी पुनर्जीवित करना है. 

बंद चीनी मिलों की सूची और प्राथमिकता समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने उन विशिष्ट मिलों को चिन्हित किया जो वर्षों से बंद पड़ी हैं. इनमें चनपटिया, बाराचकिया, मोतिहारी, मढ़ौरा, मोतीपुर और सकरी जैसी महत्वपूर्ण मिलें शामिल हैं. अच्छी खबर यह है कि गोपालगंज की सासामूसा चीनी मिल को फिर से चालू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बाकी मिलों के लिए भी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया तेज की जाए. इन औद्योगिक केंद्रों का सक्रिय होना राज्य के विकास का नया ढांचा तैयार करेगा.

किसानों के लिए खुशहाली का नया दौर 

राज्य सरकार का मानना है कि इन मिलों के पुनर्जीवित होने से गन्ना किसानों की तकदीर पूरी तरह बदल जाएगी. गन्ना का बेहतर मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित होने से न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि नई पीढ़ी का रुझान भी पारंपरिक खेती की ओर वापस आएगा. कृषि आधारित इन उद्योगों के पुनरुद्धार से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता आएगी. यह नियम और प्रभार सुनिश्चित करेंगे कि अन्नदाताओं को उनके कठिन परिश्रम की सही कीमत मिल सके.

रोजगार के हजारों नए अवसर 

चीनी मिलों के सुचारू संचालन से केवल प्रत्यक्ष ही नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भी स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को रोजगार के नए साधन मिलेंगे. परिवहन, लोडिंग और स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि होने से राज्य से होने वाले पलायन की समस्या पर भी काफी हद तक रोक लगेगी. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरी योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया है ताकि ‘सशक्त बिहार’ का सपना हकीकत बन सके. यह विकास कार्यों को सुव्यवस्थित करने का एक बड़ा निर्णय साबित होगा

पंचायतों के विकास के लिए भारी फंड 

औद्योगिक प्रगति के साथ-साथ बिहार के ग्रामीण विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से भी बड़ी राशि प्राप्त हुई है. केंद्र ने पंद्रहवीं वित्त आयोग की दूसरी किस्त के रूप में बिहार को कुल 803 करोड़ 79 लाख रुपये जारी किए हैं. इस फंड में 3 पंचायत समितियों और 7 ग्राम पंचायतों की वह अतिरिक्त राशि भी शामिल है, जिसका प्रभार पहले कुछ विसंगतियों के कारण रोक दिया गया था. अब जिला परिषदों और पंचायतों के विकास कार्यों को नई और प्रभावी ऊर्जा मिलेगी.

समृद्ध बिहार की ओर निर्णायक कदम 

मुख्यमंत्री द्वारा चीनी मिलों के पुनरुद्धार और केंद्र से प्राप्त इस वित्तीय अनुदान का मेल बिहार के ग्रामीण और औद्योगिक परिदृश्य की नई पटकथा लिख रहा है. पंचायती राज संस्थाओं को मिले इस धन से स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और सरकारी योजनाएं अधिक पारदर्शी होंगी. सरकार की इन नीतियों का अंतिम लक्ष्य राज्य के प्रत्येक नागरिक को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है. यह संपूर्ण कवायद ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी.

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