हिसार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शनिवार को शहर के विवेकानंद और आजाद नगर उपनगरों में विजयदशमी उत्सव मनाया गया। इस दौरान संघ कार्यकर्ताओं ने विधिवत शस्त्रपूजन करने के उपरांत शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए घोष के साथ पथ संचलन किया। विवेकानंद उपनगर के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद् हीरो सिंह रावत थे। मुख्य वक्ता के रूप में संघ के प्रान्त कुटुंब प्रबोधन गतिविधि संयोजक घनश्याम जी ने संबोधित किया। विवेकानंद उपनगर में मॉडल टाउन के सेंट्रल पार्क में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने उपस्थित कार्यकर्ताओं और अन्य को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कार और संस्कृति के संरक्षण के लिए कुटुंब संस्कृति को बचाये रखना जरूरी है। अपनी जड़ों को न भूले। कुटुंब बचेगा तो समाज और राष्ट्र प्रगति करेगा।
विजयदशमी उत्सव में बोले जिला कार्यवाह सतीश कुमार
संघ स्थापना के समय से लेकर वर्तमान तक राष्ट्रीय एकता के विचार को लगातार आगे बढ़ा रहा है। संघ ने समाज को बांटने का कार्य नहीं किया। संघ सदैव समरसता के भाव को अग्रणी रखकर व्यक्ति निर्माण के कार्य से सामाजिक एकरूपता बढ़ाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि संघ के कार्यकर्ता को राष्ट्र के प्रति कार्य के लिए किसी आदेश की आवश्यकता नहीं होती। वे तो सदैव इसके लिए तैयार रहते हैं। आजाद नगर में पायनियर एकेडमी में आयोजित विजयदशमी उत्सव में जिला कार्यवाह सतीश कुमार ने कहा कि संघ की शाखा से मिलने वाले संस्कार उच्चकोटि के भविष्य का निर्माण करते हैं। विजयदशमी पर्व धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है। संघ की स्थापना भी इसी दिन हुई थी। संघ का विचार स्थापना के समय जो था वो आज भी है। संघ के प्रकल्प समाज और राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
जिला बौद्धिक प्रमुख ने संघ शताब्दी वर्ष के कार्यों को आत्मसात करने का किया आह्वान
उन्होंने कहा कि संघ किसी पर अपने विचार थोपने का कार्य नहीं करता। संघ व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है। संघ के कार्यकर्ता के लिये राष्ट्र सदैव सर्वोपरि रहता है। देश पर जब भी कोई संकट की घड़ी आई है। संघ के कार्यकर्ताओं ने अग्रणी भूमिका निभाई। शुक्रवार को सुभाष नगर में भास्कर उपनगर में भी विजयदशमी उत्सव मनाया गया। मुख्य अतिथि पूर्व अधीक्षक अभियंता अभयराम सैनी रहे। मुख्य वक्ता जिला बौद्धिक प्रमुख सुनील तिवारी जी रहे। उन्होंने इस अवसर पर संघ शताब्दी वर्ष के दौरान हुए कार्यों की चर्चा करते हुए इन्हें अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।












