नेपाल में जलप्रलय ने मचाई तबाही, 616 लोगों की मौत; लापता लोगों की तलाश जारी

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नई दिल्ली: नेपाल के पहाड़ी इलाकों में मची कुदरती तबाही ने विकराल रूप ले लिया है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों से शुरू हुए सैलाब ने देखते ही देखते कई बस्तियों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं का नामोनिशान मिटा दिया। इस भीषण जलप्रलय के कारण अब तक 587 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2,500 से अधिक लोग जिंदगी और मौत के बीच लापता बताए जा रहे हैं। आपदा की इस घड़ी में सैकड़ों भारतीय भी फंसे हुए हैं, जिससे राहत अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

भारतीय नागरिकों पर संकट और रेस्क्यू

आपदा के बीच करीब 320 भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के 100 लोगों से संपर्क नहीं हो पाया है, जिनकी तलाश के लिए बचाव दल प्रयासरत हैं। हालांकि, राहत की खबर यह है कि तिब्बत क्षेत्र में मौजूद 400 भारतीय सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क स्थापित कर लिया गया है। नेपाल रेड क्रॉस के अनुसार, इस तबाही से 90 हजार से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

ग्लेशियर टूटने से मची भारी तबाही

शुरुआती जांच के मुताबिक, ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में ग्लेशियर टूटने से बर्फ, चट्टान और मलबे का विशाल हिस्सा नीचे लेंडे नदी में आ गिरा। मलबा गिरने से नदी का प्रवाह रुक गया और जब यह प्राकृतिक रुकावट टूटी, तो मलबे के साथ आए पानी के भीषण सैलाब ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचा दी।

हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान

बाढ़ के उफान ने 13 प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। इन प्रोजेक्ट्स से जुड़े करीब 933 कर्मचारी लापता हो गए थे, जिनमें से 254 को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अकेले अपर त्रिशूली-1 परियोजना से ही 576 कर्मचारी अभी भी लापता हैं, जिनके सुरंगों में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

अस्थायी झील से दोबारा बाढ़ का अलर्ट

तबाही के बाद अब सबसे बड़ा खतरा भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में बनी एक अस्थायी झील से उत्पन्न हो गया है। मलबे के कारण जमा हुए पानी की निगरानी सैटेलाइट से की जा रही है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक, इस झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी इकट्ठा हो चुका है, जिसके अगले तीन दिनों में बढ़कर 50 लाख क्यूबिक मीटर तक पहुंचने की आशंका है। यदि झील का प्राकृतिक बांध टूटता है, तो निचले इलाकों में एक बार फिर भयानक बाढ़ आ सकती है। हालांकि, शनिवार सुबह तक भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में जलस्तर सामान्य बना हुआ है।

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