नवाज शरीफ की उम्मीदों पर फिरा पानी, हाथ से निकली पीएम की कुर्सी, इन्हें मिली जिम्मेदारी

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@Tiger_G_
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नई दिल्ली: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की तथाकथित विधानसभा में सियासी गतिरोध के बाद आखिरकार नई सरकार का चेहरा साफ हो गया है। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के वरिष्ठ नेता बैरिस्टर इफ्तिखार अली गिलानी को PoK का नया प्रधानमंत्री चुन लिया गया है। मुजफ्फरबाद में हुए मतदान की प्रक्रिया में गिलानी ने 44 में से 30 मत हासिल कर पूर्ण बहुमत साबित किया, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के उम्मीदवार मुख्तार अहमद के पक्ष में महज 14 वोट ही पड़े।

नवाज शरीफ का फैसला और पार्टी के भीतर खींचतान

नवाज शरीफ ने गुरुवार को ही गिलानी के नाम को हरी झंडी दे दी थी, जिसके बाद शुक्रवार को उनकी ताजपोशी का रास्ता साफ हो गया। चुनाव प्रचार के दौरान नवाज शरीफ ने शहबाज शरीफ से कहकर गिलानी को पीएम बनवाने का वादा किया था। 

इस फैसले ने PML-N के भीतर ही दरार पैदा कर दी। पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष शाह गुलाम कादिर ने गिलानी की उम्मीदवारी से असहमति जताते हुए सदन की कार्यवाही से दूरी बनाए रखी और वोटिंग में भाग नहीं लिया।

अधूरी असेंबली और चुनाव में हिंसा के गंभीर आरोप

53 सीटों वाली इस तथाकथित विधानसभा का वर्तमान गणित बेहद उलझा हुआ है। हिंसा और बिगड़ी कानून-व्यवस्था के चलते पुंछ और सुधनोती जिलों की 7 सीटों पर मतदान नहीं हो सका, जिससे सदन में महज 46 विधायक ही मौजूद थे। मतदान के दिन स्पीकर ने वोट नहीं डाला और कादिर की अनुपस्थिति के चलते कुल 44 सदस्यों ने ही हिस्सा लिया।

जुलाई और अगस्त में तीन चरणों में हुए इन चुनावों पर बड़े पैमाने पर धांधली और चुनावी हिंसा के आरोप लगे। प्रत्यक्ष चुनाव की 38 सीटों में से PML-N ने 25 और PPP ने 12 सीटों पर कब्जा जमाया था, जबकि अवामी दस्त-ओ-बाजू पार्टी के इकलोटे विधायक ने नवाज की पार्टी को समर्थन दिया। इसके अलावा, 8 आरक्षित सीटों में से 6 सीटें नवाज शरीफ के खेमे के खाते में गईं।

सुलगते PoK में नई सरकार के सामने चुनौतियां

यह सत्ता परिवर्तन ऐसे समय में हुआ है जब पूरा PoK जनआक्रोश की आग में झुलस रहा है। जून की शुरुआत से ही ‘संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों के विरोध में व्यापक प्रदर्शन कर रही है। हिंसक झड़पों में आम नागरिकों और सुरक्षाबलों की जानें जा चुकी हैं, जिसके बाद प्रशासन ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था। गिलानी खुद भी प्रत्यक्ष चुनाव हारने के बाद आरक्षित सीट के जरिए सदन में पहुंचे हैं, जिससे स्थानीय जनता का आक्रोश और ज्यादा भड़क सकता है।

भारत का स्पष्ट और अडिग रुख

भारत ने हमेशा की तरह पाकिस्तान द्वारा PoK में कराई जाने वाली किसी भी राजनीतिक या चुनावी गतिविधि को पूरी तरह खारिज किया है। नई दिल्ली का साफ और अडिग रुख है कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा हैं, जिस पर पाकिस्तान ने गैर-कानूनी और जबरन कब्जा जमा रखा है। जनविरोधी माहौल और चुनावी धांधली के बीच गिलानी का पद संभालना नई हुकूमत के लिए कांटों भरा ताज साबित होने वाला है।

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