नई दिल्ली: केरल के मौलाना कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार के महिलाओं को लेकर दिए विवादित बयान के बाद अब ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी का बयान सामने आया है. उन्होंने देश में अपराध, खासकर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए इस्लामिक कानून और शरिया लागू करने की वकालत की है.
इस्लामिक कानून जरूरी है: रशीदी
साजिद रशीदी ने दावा किया कि जब तक देश में इस्लामिक कानून लागू नहीं होगा, तब तक अपराधों पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकती. उन्होंने बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों के लिए बेहद सख्त सजा की मांग की. उनका कहना था कि ऐसे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलने पर अपराध करने वालों में डर पैदा होगा.
उन्होंने महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. रशीदी ने कहा कि छोटी बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक के खिलाफ अपराध की खबरें सामने आना गंभीर समस्या है और माता-पिता के लिए अपने बच्चों की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गई है.
महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर क्या बोले?
रशीदी ने केरल के मौलाना एपी अबूबकर मुसलियार के बयान का समर्थन किया. मुसलियार ने हाल ही में महिलाओं के सार्वजनिक जीवन में आने और पुरुषों के साथ मंच साझा करने को लेकर आपत्ति जताई थी और महिलाओं के घर में रहने की बात कही थी.
रशीदी ने सवाल उठाया कि इस बयान में गलत क्या है. उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो उन्हें घर में रहना चाहिए. उन्होंने पारंपरिक पारिवारिक भूमिकाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पुरुष बाहर काम करके कमाए और महिला घर तथा बच्चों की देखभाल करे.
शरिया लागू करने की कही बात
रशीदी ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस्लाम में बताए गए सख्त कानून लागू करने की बात कही. उन्होंने बलात्कार जैसे अपराधों के दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की.
उनके इन बयानों ने महिलाओं की स्वतंत्रता, सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी और धार्मिक कानूनों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. हालांकि, उनके समर्थक इसे धार्मिक विचार बताते हैं, जबकि आलोचक महिलाओं को घर तक सीमित करने वाली सोच पर सवाल उठा रहे हैं.












