नॉर्वे में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में लगे 2 साल, भारतीय शख्स ने खर्च किए 6 लाख रुपये, पोस्ट वायरल

0
5
Indian man spends ₹6 lakh and two years to get a driving license in Norway
AI Generated

नई दिल्ली: भारत में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना आमतौर पर एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है, लेकिन दुनिया के कुछ देशों में इसके लिए काफी लंबी ट्रेनिंग और सख्त टेस्ट से गुजरना पड़ता है। नॉर्वे में रहने वाले एक भारतीय शख्स विनोद ने अपना ऐसा ही एक्सपीरियंस शेयर किया है। उनके मुताबिक, नॉर्वे में ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने में उन्हें करीब दो साल लग गए और इस पूरी प्रक्रिया पर लगभग 6 लाख रुपये खर्च हुए। वहीं अब शख्स द्वारा शेयर किया गया एक्सपीरियंस सोशल मीडिया खूब वायरल हो रहा है। 

2011 में पहुंचे थे नॉर्वे 

रिपोर्ट के अनुसार, विनोद 2011 में नॉर्वे पहुंचे थे। वहां रहने के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कार चलाना सीखना काफी जरूरी है। हालांकि, नॉर्वे का मौसम और भौगोलिक परिस्थितियां भारत से काफी अलग हैं। बर्फबारी, पहाड़ी सड़कें, लंबी दूरी और बेहद ठंडे मौसम में ड्राइविंग करना अपने आप में चुनौती है। विनोद ने शुरुआत में पड़ोसी की मदद से गाड़ी चलाना सीखा। लेकिन लाइसेंस हासिल करने के लिए सिर्फ ड्राइविंग आना पर्याप्त नहीं था। उन्हें कई अनिवार्य ट्रेनिंग कोर्स, थ्योरी टेस्ट, सेफ्टी ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल अभ्यास से गुजरना पड़ा।

बर्फीली सड़कों से लेकर सुरंगों तक ट्रेनिंग

विनोद के मुताबिक, ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने अलग-अलग तरह की सड़कों पर गाड़ी चलाने का अभ्यास किया। इसमें बर्फ से ढकी सड़कें, पहाड़ी रास्ते, सुरंगें, हाईवे और छोटी सड़कें शामिल थी। इसके अलावा, जिस व्यक्ति की निगरानी में ड्राइविंग की प्रैक्टिस की जाती है, उसके पास भी कम से कम पांच साल का ड्राइविंग अनुभव होना जरूरी था। नॉर्वे में ड्राइविंग स्कूल आमतौर पर घंटे के हिसाब से फीस लेते हैं। ऐसे में जितनी अधिक प्रैक्टिस की जरूरत होती है, खर्च भी उतना ही बढ़ता जाता है।

पहली कोशिश में हुए फेल

विनोद पहली बार फाइनल ड्राइविंग टेस्ट में सफल नहीं हो सके। करीब एक घंटे चले इस टेस्ट में उन्हें ट्रैफिक के बीच ड्राइविंग के साथ सुरंग और पहाड़ी रास्तों पर भी गाड़ी चलानी थी। पहली कोशिश में असफल होने के बाद उन्होंने करीब दो महीने और अभ्यास किया। इसके बाद दोबारा टेस्ट दिया और इस बार सफल रहे।

विनोद का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में करीब दो साल लगे और उस समय लगभग 6 लाख रुपये खर्च हुए। उनके अनुसार, आज के हिसाब से यह रकम 10 लाख रुपये से ज्यादा के बराबर हो सकती है। उनका मानना है कि नॉर्वे में ड्राइविंग टेस्ट का मकसद केवल गाड़ी चलाने की क्षमता जांचना नहीं, बल्कि सड़क पर सुरक्षित और जिम्मेदार ड्राइविंग सुनिश्चित करना है। उनकी कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने भारत और नॉर्वे की लाइसेंस प्रक्रिया को लेकर करने लगे है। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here