सड़क की मिट्टी में छिपा सोना, भारत के इस शहर में धूल बटोरकर कमाते हैं लोग, वीडियो वायरल

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Indian city where gold is found in the roadside soil and sold at a high price viral video
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नई दिल्ली: भारत में कई बाजार अपनी अनोखी पहचान के लिए मशहूर हैं. इन्हीं में से एक हैदराबाद का गुलजार हौज इलाका भी है, जो इन दिनों किसी खास दुकान या सामान की वजह से नहीं, बल्कि सड़क किनारे जमा होने वाली मिट्टी और धूल को लेकर चर्चा में है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो में महिलाएं सड़क और फुटपाथ की सफाई करती और वहां से मिट्टी व धूल इकट्ठा करती नजर आ रही हैं. 

वायरल वीडियो में क्या? 

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि महिलाएं झाड़ू और लोहे के ब्रश की मदद से सड़क तथा पत्थरों के बीच फंसी धूल निकालकर उसे अलग-अलग जगह जमा कर रही हैं. दावा किया जा रहा है कि इस धूल को बेचकर महिलाएं अच्छी कमाई करती हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर सड़क की यह सामान्य दिखने वाली धूल इतनी खास क्यों है.

धूल में मिल जाते हैं कीमती धातुओं के कण

गुलजार हौज चारमीनार के पास स्थित है और इस जगह को लंबे समय से सोने-चांदी के आभूषणों के कारोबार के लिए जाना जाता है. यहां बड़ी संख्या में ज्वेलरी की कटिंग, घिसाई और पॉलिशिंग का काम होता है. इस दौरान सोने और चांदी के बेहद बारीक कण निकलकर आसपास की धूल, मिट्टी और कभी-कभी नालियों की गाद में मिल जाते हैं.

इसी वजह से कुछ लोग ऐसी धूल और गाद को इकट्ठा करते हैं. बाद में इसे उन लोगों को बेचा जाता है, जो रिफाइनिंग की प्रक्रिया के जरिए इसमें मौजूद कीमती धातुओं के सूक्ष्म कण अलग करते हैं. यानी जिसे आम नजरों से महज कचरा या मिट्टी समझा जा सकता है, उसमें कीमती धातुओं के अंश मौजूद हो सकते हैं.

कितने रुपये किलो बिकती है मिट्टी

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में इस मिट्टी की कीमत करीब 100 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है. हालांकि, वीडियो में सफाई कर रही कुछ महिलाओं से जब इसकी कीमत पूछी गई तो उन्होंने करीब 10 रुपये प्रति किलो मिलने की बात कही. ऐसे में इसकी वास्तविक कीमत को लेकर अलग-अलग फिलहाल कोई भी जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ पाई है. 

कोलकाता में भी है ऐसी परंपरा

सिर्फ हैदराबाद ही नहीं, कोलकाता के बोउबाजार इलाके में भी ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी धूल और गाद को इकट्ठा करने का काम लंबे समय से देखा जाता है. यहां बड़ी संख्या में आभूषण बनाने वाली वर्कशॉप हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेहारावाला या न्यूआरा कहे जाने वाले कुछ लोग सुबह के समय गलियों, फुटपाथों और नालियों से जमा गाद और धूल इकट्ठा करते हैं. 

धूल नहीं, कमाई का जरिया 

मान्यता है कि आभूषण बनाने, घिसने और पॉलिश करने के दौरान निकले सोने के बारीक कण इन जगहों पर जमा हो जाते हैं. बाद में इस सामग्री को प्रोसेस कर उससे कीमती धातुओं के कण निकालने की कोशिश की जाती है. यही वजह है कि इन इलाकों की धूल भी कुछ लोगों के लिए आम मिट्टी नहीं, बल्कि कमाई का जरिया बन जाती है.

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