लखनऊ: उत्तर प्रदेश के एटा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। आरोप है कि एक होम ट्यूटर छोटे-छोटे बच्चों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और स्क्रिप्टेड रील बनवा रही थी। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि 6 से 10 साल के बच्चे क्लास में बैठे हैं। एक बच्चा कहता है कि उसकी बोतल चोरी हो गई, दूसरा अपने सामान के गायब होने की बात कहता है।
इस पर टीचर पूछती है कि ये सब चोरियां कौन कर रहा है? जवाब में बच्चे पीएम मोदी पर अभद्र टिप्पणी करते हैं और खुद को छोटा कॉकरोच तक कहते नजर आते हैं। वीडियो सामने आते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। वहीं सोशल मीडिया अब लोग इस वीडियो को मासूम बच्चों के मन में जहर भरने और उनका ब्रेनवाश करने की साजिश बताया।
I am absolutely fuming with rage and feeling sick in the stomach, please share this and tag police/NCPCR this is a case of severe child abuse
There is an Instagram handle called Pratibha_edu_squad who falsely claims to be an IAS and offers tuition to students, attracting 1000s… pic.twitter.com/WwdQ3FC5FT
— Muji Singh Rangi (@mujifren) September 28, 2026
एटा पुलिस ने एक्शन
मामला तूल पकड़ने के बाद एटा पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने पुष्टि की है कि आरोपी ट्यूटर का नाम प्रतिभा है, जो इंस्टाग्राम पर ‘प्रतिभा एडू स्क्वॉड’ नाम से पेज चलाती है। वहीं अब उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोप है कि वह ट्यूशन पढ़ने आने वाले बच्चों से केंद्र सरकार के खिलाफ नफरत फैलाने वाले वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर डाल रही थी।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी गंभीरता ने लिया मामला
इस घटना को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए इसे बच्चों की गरिमा, निजता और मानसिक सुरक्षा से खिलवाड़ बताया। NHRC ने एटा के एसएसपी, जिलाधिकारी के साथ-साथ मेटा इंडिया के कंट्री हेड और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को नोटिस जारी किया है।
आयोग ने सभी से दो हफ्ते के अंदर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट (ATR) मांगी है। NHRC का कहना है कि अपने राजनीतिक या वैचारिक फायदे के लिए बच्चों का इस तरह इस्तेमाल करना बाल अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। बिना माता-पिता की सहमति के मासूमों से ऐसी स्क्रिप्ट बुलवाना उनके मनोवैज्ञानिक विकास के लिए खतरनाक है। आयोग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को भी ऐसी सामग्री पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।












