पटना: बिहार में बाढ़ ने एक बार फिर विकराल रूप ले लिया है। गंगा, गंडक, बागमती और कोसी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे करीब 20 जिलों में हालात बिगड़ गए हैं। गुरुवार को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पटना के मरीन ड्राइव पहुंचे और गंगा के बढ़ते जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए है। मीडिया से बातचीत में सीएम ने कहा कि अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं और सरकार पूरी तरह अलर्ट पर है।
‘यह चिंता का विषय है’: मुख्यंमत्री
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह चिंता का विषय है। गंगा हो या गंडक, इतना पानी पहले कभी नहीं आया। सोन नदी में भी जलस्तर काफी बढ़ा है।” उन्होंने बताया कि फिलहाल कहीं बड़े कटाव की खबर नहीं है, लेकिन तटबंधों पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ पीड़ितों तक मदद पहुंचाने के लिए वायुसेना की मदद ली गई है, जिसके शुक्रवार से राहत कार्य में उतरने की उम्मीद है। इससे पहले सीएम ने बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित पश्चिम चंपारण का हवाई सर्वे किया था। पश्चिम चंपारण के अलावा पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, सहरसा, वैशाली और मुजफ्फरपुर में गंडक ने तबाही मचा रखी है।
नेपाल की बारिश से बढ़ा संकट
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, नेपाल और यूपी में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी कई जगहों पर अब तक के सबसे ऊंचे बाढ़ स्तर को पार कर गई है। गोपालगंज के डुमरियाघाट में पिछले 36 घंटे से गंडक का जलस्तर HFL से 22 सेंटीमीटर ऊपर है। सारण के रेवा घाट और वैशाली के लालगंज में भी यही स्थिति है।
कई गांवों में घुसा पानी
बुधवार रात सारण के पनापुर में दायां सारण तटबंध और मुजफ्फरपुर के साहेबगंज में रिंग तटबंध टूट गया, जिससे कई गांवों में पानी घुस गया। विभाग ने बताया कि गंगा भी खतरे से ऊपर बह रही है, जिससे गंडक का पानी निकल नहीं पा रहा और दबाव बढ़ रहा है। अन्य नदियों की बात करें तो बेनीबाद में बागमती खतरे से 1.35 मीटर ऊपर, तो पटना के गांधी घाट पर गंगा 1.07 मीटर ऊपर बह रही है। फिलहाल पटना, भोजपुर, बक्सर, बेगूसराय, भागलपुर, सुपौल, खगड़िया समेत 20 जिलों के निचले इलाके जलमग्न हैं और प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।












