रतिया: आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा। हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति में आत्मिक बल एवं धार्मिक आस्था जागृत होती है। हवन-यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है और व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। भंडारे का प्रसाद तीन अक्षर से मिलकर बना है। पहला ‘प्र’ का अर्थ प्रभु, दूसरा ‘सा’ का अर्थ साक्षात् व तीसरा ‘द’ का अर्थ होता है दर्शन। यह केवल प्रसाद नहीं बल्कि प्रभु का साक्षात् दर्शन है। मनुष्य शरीर भी भगवान का दिया हुआ सर्वश्रेष्ठ प्रसाद है। जीवन में प्रसाद का अपमान करने से भगवान का ही अपमान होता है। भगवान को लगाए गए भोग का बचा हुआ शेष भाग श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद बन जाता है।
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के समापन पर आचार्य का प्रवचन
उक्त प्रवचन संत बाबा बाबू राम जी दुगाल वाले व संत बाबा कर्म चंद जी बच्चुआना वालों की परम कृपा से श्रीकृष्ण गौशाला स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में गौ सेवा हेतु पितृ पक्ष में श्रीकृष्ण गौशाला कमेटी द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा व ज्ञान यज्ञ के समापन दिवस पर प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य श्री राम सेवक शास्त्री जी कालवाणु वाले ने कहे।
अंतिम दिन हवन-यज्ञ, कथा, भंडारा व सम्मान समारोह
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा व ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन मंगलवार को गौशाला कमेटी, समस्त धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के सदस्य व काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने सुबह 8 बजे से सुबह 10 बजे तक संयुक्त रूप से हवन-यज्ञ किया। हवन-यज्ञ के दौरान मंदिर पुजारी पवन कौशिक व धीरज भारद्वाज जी ने संयुक्त रूप से उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने जीवन में भगवान श्रीकृष्ण जी के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। हवन-यज्ञ उपरांत सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक कथा एवं कथा उपरांत अटूट भण्डारे का आयोजन हुआ।
कथा में श्री नारायण मुनी जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने संगत को अपने दर्शनों से निहाल किया।कथा समापन पर रतिया से भाजपा के एस सी वित्त आयोग के चैयरमैन सरदार बलदेव सिंह ग्रोहा व उनके साथ भाजपा नेता व प्रमुख समाजसेवी प्रमोद बांसल ने पहुंच कर व्यास पीठ को नमन किया।मंच संचालन धर्मेन्द्र गोस्वामी द्वारा किया गया।अंत में समस्त कमेटी द्वारा सभी आगुंतकों का आभार व्यक्त करते हुए आचार्य श्री राम सेवक शास्त्री जी कालवाणु वाले सहित सभी मुख्यातिथियों को पटका पहनाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।












