नई दिल्ली: दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से महिला सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। सितंबर के आखिरी हफ्ते से दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू और कई अन्य कॉलेजों की छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि सार्वजनिक जगहों पर उन्हें बिना डर के आने-जाने की आजादी मिले और महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा पर सख्त कार्रवाई हो। वहीं इन प्रदर्शनों के दौरान हाथों में पोस्टर और कई तरह के नारे देखने को मिले, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।
वायरल हुए तीखे नारे
प्रदर्शन के दौरान ‘मर्द जात हाय-हाय’, ‘सबसे गंदी मर्द जात’, ‘जहां दर्द, वहां मर्द’ और ‘ओ पुरुष, कल आना’ जैसे नारे लगे। दिल्ली सचिवालय के बाहर हुए प्रदर्शन के वीडियो भी खूब शेयर हुए। छात्राओं का कहना था कि जब भी किसी महिला के साथ छेड़छाड़ या हिंसा होती है, तो सवाल उसी से पूछे जाते हैं – उसने क्या पहना था, वह रात में बाहर क्यों निकली, वह अकेली क्यों थी।
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें कॉलेज से जल्दी घर लौटना चाहिए? क्या रात में पार्क जाना बंद कर देना चाहिए? क्या पुरुष दोस्तों से मिलना गलत है? उनका कहना था कि पाबंदी महिलाओं पर नहीं, बल्कि उन्हें असुरक्षित महसूस कराने वाले लोगों पर लगनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर दूसरा पक्ष भी आया सामने
वहीं इन नारों के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर बहस दो हिस्सों में बंट गई। कई पुरुष यूजर्स ने कहा कि अगर कुछ पुरुष अपराध करते हैं तो पूरे पुरुष वर्ग को दोषी ठहराना सही नहीं है। इसके बाद इंस्टाग्राम और एक्स पर कई रील और मीम्स वायरल होने लगे, जिसमें पुरुषों के संघर्ष को दिखाया गया। किसी रील में बॉर्डर पर ड्यूटी करते जवान दिखे, तो किसी में नाले में उतरकर काम करते सफाईकर्मी और दिन-रात मेहनत कर परिवार पालने वाले पिता। इन वीडियो के जरिए यह संदेश दिया गया कि हर पुरुष एक जैसा नहीं होता।
‘हर मर्द एक जैसा नहीं’ बना जवाबी नारा
महिलाओं के ‘एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा’ जैसे नारों के जवाब में अब ‘एक इडली, दो डोसा, हर मर्द नहीं एक जैसा’ जैसी लाइनें शेयर की जा रही हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि वे महिला सुरक्षा की मांग का पूरा समर्थन करते हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरे समुदाय को गाली देना समाधान नहीं है। फिलहाल दिल्ली में महिला सुरक्षा पर शुरू हुई यह चर्चा अब लैंगिक बराबरी और आपसी सम्मान पर बड़ी बहस में बदल गई है।












