चंडीगढ़: आप पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने गुरुवार को एक बार फिर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और श्री आनंदपुर साहिब सराय मामले पर एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी और इसके “चीफ पैट्रन” सुखबीर सिंह बादल से जवाब मांगा। उन्होंने एसजीपीसी सराय में महिला के रहने, इलाज के लिए ₹1 लाख देने और रजिस्टर में गड़बड़ियों के बारे में एसजीपीसी प्रधान द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आप पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री आनंदपुर साहिब में हुई पूरी घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। एसआईटी का पंजाब पुलिस ऑफिसर गुरबंस सिंह बैंस नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि सिमरनजीत सिंह लंग और करण सिंह संधू इसके मेंबर हैं। इस जांच से कई ऐसे सवाल सुलझ जाएंगे जो अब तक अनसुलझे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “जांच से पता चलेगा कि महिला बहरीन से कैसे आई, श्री आनंदपुर साहिब में एसजीपीसी सराय में उसके आने और रहने का इंतज़ाम किसने किया, उसे क्या इंतज़ाम और सुविधाएँ दी गईं, इन सुविधाओं को किसने मंज़ूरी दी, और उसे महीनों तक वहाँ कैसे रहने की इजाज़त कैसे दी गई।
सरकार द्वारा औपचारिक जांच के आदेश
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने दावा किया, “भगवंत सिंह मान सरकार ने अब पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, जिससे कई ऐसे सवालों के जवाब मिल जाएँगे जो अब तक अनसुलझे थे। यह मुद्दा किसी संस्था को बदनाम करने का नहीं है। एसजीपीसी एक सम्मानीय संस्था है, लेकिन अगर इसके मैनेजमेंट और श्री आनंदपुर साहिब में हुई घटनाओं पर सवाल उठे हैं, तो उन सवालों के जवाब मिलने चाहिए। जनता और अलग-अलग सिख संगठनों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बाद सरकार ने अब औपचारिक जांच के आदेश दिए हैं।” उन्होंने विस्तार से बताया, “कई दिन बीत जाने के बाद भी एसजीपीसी ने पंथ से निकाले गए व्यक्तियों के बारे में अपने गुरुद्वारों के बाहर बोर्ड नहीं लगाए हैं। उन्होंने पूछा कि अगर एसजीपीसी कहती है कि यह सुनिश्चित करना उसकी ड्यूटी है कि संदेश सब तक पहुंचे, तो यह बोर्ड अभी तक एसजीपीसी प्रबंधकिये गुरुद्वारे में क्यों नहीं लगाए गए।
रजिस्टर में गड़बड़ी पर सवाल
हरजिंदर सिंह धामी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का ज़िक्र करते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “एसजीपीसी प्रधान द्वारा खुद दिखाया गया रजिस्टर और सवाल खड़ा करता हैं। अगर आप रजिस्टर को ज़ूम इन करेंगे, तो कमरे पर साफ़-साफ़ ‘अमरजीत सिंह चावला ने सिफारिश किया’ और ‘फ़्री’ लिखा हुआ है। फिर वे कैसे दावा कर सकते हैं कि कमरा ₹1,000 देकर बुक किया गया था?”
₹1 लाख देने के दावे पर सवाल
बलतेज पन्नू ने कहा, “हरजिंदर सिंह धामी ने पहले महिला को ₹1 लाख देने से मना किया था, लेकिन बाद में अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में माना कि यह रकम धर्म अर्थ कमेटी द्वारा दी गई थी। एसजीपीसी को बताना चाहिए कि हरजिंदर सिंह धामी के समय में कितने मानसिक रूप से बीमार मरीज़ों को इलाज के लिए ₹1 लाख दिए गए और ये भुगतान किसकी सिफारिशों पर किए गए।”
एप्लीकेशन और लंबे समय तक रहने पर सवाल
उन्होंने उस एप्लीकेशन पर भी सवाल उठाए जिसके आधार पर ₹1 लाख मंज़ूर किए गए थे। बलतेज सिंह पन्नू ने पूछा, “एप्लीकेशन में ही लिखा है कि महिला कई महीनों से श्री आनंदपुर साहिब की सराय में रह रही थी। क्या किसी ने ध्यान नहीं दिया कि वह महीनों से वहां रह रही थी? एक बार कोई झूठ बोल देता है, तो उसे झूठ छिपाने के लिए बार-बार झूठ बोलना पड़ता है।” बलतेज पन्नू ने सवाल किया कि मानसिक मानसिक रूप से बीमार बताई गई महिला को सराय में रखने और उसे इलाज के लिए ₹1 लाख देने का क्या तर्क है? चेक श्री आनंदपुर साहिब के बजाय अमृतसर में क्यों भुगताया दिया गया? इलाज कहां चल रहा था और किन डॉक्टरों ने इसकी सिफारिश की थी?”
रजिस्टर छेड़छाड़ का पता कब चला
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने आगे पूछा, “रजिस्टर के साथ कथित छेड़छाड़ का पता असल में कब चला? क्या छेड़छाड़ का पता एफआईआर दर्ज होने के बाद चला, या एसजीपीसी कमेटी बनने के समय? अगर यह पहले से पता था, तो इसे एसजीपीसी की रेगुलर कार्रवाई में क्यों नहीं लाया गया?” बलतेज पन्नू ने आगे कहा, “एसजीपीसी कुर्बानियों पर बनी एक सम्मानीय संस्था है। कोई भी संस्था पर सवाल नहीं उठा रहा। लेकिन अगर इसके मैनेजमेंट पर सवाल हैं, तो हर गुरु नानक नाम लेवा को यह सवाल पूछने का हक है और आज कई सिख संस्थाएं इस घटनाक्रम पर सवाल उठा रही हैं।”
ड्राइवर मोहन सिंह के निलंबन पर सवाल
उन्होंने ड्राइवर मोहन सिंह के निलंबन पर भी सवाल उठाए। बलतेज सिंह पन्नू ने पूछा, “अगर एसजीपीसी प्रधान के मुताबिक, महिला को कोई गाड़ी नहीं दी गई, तो ड्राइवर को निलंबित क्यों किया गया? अगर वह ड्राइवर था, तो वह किसकी गाड़ी चला रहा था?” बलतेज पन्नू ने कहा, “एफआईआर में नामजद लोगों और केस से जुड़े दूसरे लोगों के बयानों ने और सवाल खड़े कर दिए हैं। अमरजीत सिंह चावला ने अपने इंटरव्यू में बताया था कि विरसा सिंह वल्टोहा ने महिला को सराय में रुकने के लिए कहा था। अगर ऐसा है, तो वह इतने लंबे समय से इस बात से कैसे इनकार कर रहे थे कि वह महीनों से वहां रुकी थी?”
328 लापता स्वरूपों और सीबीआई जांच की मांग पर सवाल
उन्होंने 328 लापता स्वरुपों के विवाद को याद करते हुए हरजिंदर सिंह धामी द्वारा सीबीआई जांच की मांग पर भी सवाल उठाए। बलतेज सिंह पन्नू ने कहा, “328 गायब स्वरुपों पर हुए विवाद के दौरान, एसजीपीसी ने सीबीआई को शामिल करने का विरोध किया था और कहा था कि वह अपनी जांच खुद कर सकती है। अब आप किस आधार पर सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं? सीबीआई ने 2015 के बेअदबी मामले में पहले ही क्लोजर रिपोर्ट जमा कर दी थी। हरजिंदर सिंह धामी को ऐसी मांगें उठाने से पहले अपना रिकॉर्ड ठीक करना चाहिए।”
पांच घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस के ऐलान को चुनौती
बलतेज सिंह पन्नू ने हरजिंदर सिंह धामी द्वारा पांच घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के ऐलान को भी चुनौती दी। उन्होंने कहा, “अगर आप पांच घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं, तो कम से कम उन लोगों को तो बुलाएं जो ये सवाल उठा रहे हैं। हम जानते हैं कि आप हमारे सवालों का जवाब नहीं देंगे। उन सिखों को बुलाएं जो आपके साथ पांच सवाल पूछ रहे हैं, खासकर नई पीढ़ी के लोगों को। मुझे नहीं लगता कि आप उनके पांच सवालों का भी सामना कर पाएंगे।” उन्होंने आगे कहा कि युवा पीढ़ी स्पष्टीकरणों को ऐसे स्वीकार नहीं करेगी। जब अगली पीढ़ी इन बातों को खोजेगी, तो ये सवाल फिर से सामने आएंगे। आप हमसे बच सकते हैं, लेकिन अगली पीढ़ी के सवालों से नहीं बच पाएंगे।”
एसजीपीसी को बदनाम करने की कोशिश नहीं
बलतेज पन्नू ने कहा, “ये सवाल एसजीपीसी को बदनाम करने की कोशिश नहीं हैं। एसजीपीसी को बदनाम नहीं किया जा रहा है। अगर मैनेजमेंट पर सवाल हैं, तो गुरु की शिक्षाओं को मानने वाले हर इंसान को सवाल पूछने का हक है। यहां तक कि जो इंसान अपनी जेब से ₹10 निकालकर गुरुद्वारा साहिब में चढ़ाता है, उसे भी यह पूछने का हक है कि ₹1 लाख कैसे दिए गए।” आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने हरजिंदर सिंह धामी और सुखबीर बादल से अपील की कि वे सवालों से बचने के बजाय उनका जवाब दें। बलतेज सिंह पन्नू ने कहा, “जब तक जवाब नहीं दिए जाते, ये सवाल चलते रहेंगे और बड़े होते जाएंगे।”












