सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर हूथियों का बड़ा हमला, 12 की मौत और सैकड़ों घायल, ट्रंप ने बताया भयावह

0
8

नई दिल्ली: सऊदी अरब की राजधानी रियाद का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक बार फिर हमले की चपेट में आ गया। एक सप्ताह के भीतर हुई इस तीसरी घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ताजा हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई, जबकि 309 लोग घायल हो गए। यमन के ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। घटना के बाद हवाई अड्डे को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा और रियाद आने वाली उड़ानों का रास्ता बदल दिया गया।

सऊदी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के अनुसार, मृतकों में चार सऊदी नागरिक, बांग्लादेश के दो नागरिक और अमेरिका, जॉर्डन, फिलिस्तीन, सीरिया, सूडान तथा मिस्र का एक-एक नागरिक शामिल है। घायलों को एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, विस्फोट के बाद हवाई अड्डे के अंदर अफरा-तफरी मच गई और कई घायल यात्री जमीन पर पड़े दिखाई दिए।

हवाई अड्डे पर हमला, उड़ानें प्रभावित

ताजा हमले से पहले भी इसी सप्ताह किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया था। उन घटनाओं में चार लोगों की जान गई और रनवे पर खड़े एक सऊदी यात्री विमान को भारी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों के मुताबिक, इस बार हमले से पहले कोई चेतावनी जारी नहीं हुई थी।शनिवार को हमले के बाद हवाई अड्डे का संचालन कुछ समय के लिए रोक दिया गया। रियाद आने वाली उड़ानों को दूसरे रास्तों पर भेजा गया या रद्द कर दिया गया। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 के अनुसार, हवाई अड्डे की ओर जाने वाली उड़ानों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। एक समय वहां के ऊपर केवल एक हेलीकॉप्टर दिखाई दे रहा था।

एक घायल यात्री ने रॉयटर्स को बताया कि उसने हवाई अड्डे के बाहर आसमान में एक उड़ती हुई वस्तु देखी थी। इसके बाद प्रस्थान द्वार के पास छत का एक हिस्सा गिर गया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने विस्फोट देखने की बात कही। घटना के बाद कई एंबुलेंस हवाई अड्डे की ओर जाती दिखाई दीं। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी हमले की जानकारी होने की पुष्टि की। दूतावास ने अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डे और उसके आसपास के इलाकों से दूर रहने की सलाह दी।

ट्रंप ने कहा- अमेरिका कार्रवाई पर कर सकता है विचार

हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बेहद भयावह बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका हूथी विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई में शामिल होने पर विचार कर सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि प्रशासन को हालिया हमले की जानकारी मिली है और जल्द निर्णय लिया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका तेजी से कार्रवाई करता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हमले की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि इन घटनाओं से निर्दोष नागरिकों की जान के प्रति गंभीर लापरवाही सामने आती है और इन्हें रोका जाना चाहिए। रुबियो ने बताया कि मरने वालों में एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल था।

युद्धविराम टूटने के बाद बढ़ा संघर्ष

यमन में हूथी विद्रोहियों और सरकार के बीच संघर्ष लंबे समय से जारी है। सऊदी अरब ने 2015 में गृहयुद्ध के दौरान यमन सरकार के समर्थन में सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूथियों के खिलाफ कार्रवाई की। 2022 में हुए समझौते से लड़ाई काफी हद तक थम गई थी, लेकिन बाद में तनाव फिर बढ़ने लगा। हाल के महीनों में युद्धविराम कमजोर पड़ने के साथ दोनों पक्षों के बीच संघर्ष तेज हुआ है। यमन सरकार ने इस सप्ताह हूथियों के खिलाफ नया अभियान शुरू किया। इसके जवाब में विद्रोहियों ने सऊदी हवाई क्षेत्र से बचने की चेतावनी दी और इसे सैन्य अभियान वाला क्षेत्र घोषित कर दिया।सऊदी अरब और यमन सरकार ने हूथी नियंत्रण वाले इलाकों में कई हमले किए जाने की जानकारी दी है। वहीं, विद्रोहियों का दावा है कि इन हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत आम नागरिकों की मौत हुई है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

लगातार हमलों के कारण रियाद में हवाई यात्रा प्रभावित हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब सऊदी राजधानी में ऊर्जा और निवेश से जुड़े अहम सम्मेलनों का आयोजन होना है। इससे पहले हुए हमलों के बाद भी कई एयरलाइनों ने अपनी उड़ानें रद्द या स्थगित कर दी थीं। हालांकि, सम्मेलन के आयोजकों ने शनिवार को स्पष्ट किया कि कार्यक्रम तय योजना के अनुसार जारी रहेंगे। उन्होंने प्रतिभागियों को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भरोसा दिलाने की कोशिश की। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सऊदी अरब इन हमलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को कैसे मजबूत करता है और अमेरिका इस मामले में क्या कदम उठाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here