नई दिल्ली: नेपाल में बाढ़ की तबाही थमने का नाम नहीं ले रही हैं। दो महीने पहले आई भीषण बाढ़ के बाद एक बार फिर जल प्रलय ने दस्तक दी है। बता दें, रविवार तड़के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडक नदी में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 4 बजे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा और देखते ही देखते पानी गांवों में घुस गया। वहीं इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें साफ दिख रहा है कि कैसे तेज रफ्तार से सैलाब गांव की ओर बढ़ रहा है। लोग जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागे।
नेपाल में बार बार तबाही आ रही है अब फिर बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आई है। प्रशासन ने लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा है https://t.co/Hn5jGjSxM2
— yogeshh sharma.. (@yogeshsh2135) October 11, 2026
बाढ़ में क्या-क्या बहा?
‘काठमांडू पोस्ट’ के मुताबिक, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड-3 के अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत इलाके में नदी किनारे बसे मकान बह गए। वार्ड को जोड़ने वाला एक पुल भी पानी में बह गया। शुरुआती जानकारी में 35 से अधिक घरों के बहने की बात सामने आ रही है, जबकि चार लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और स्थानीय टीमें उनकी तलाश में जुटी हैं।
गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि सिउरीबास के ऊपरी इलाके में भूस्खलन हुआ था, जिसके बाद नदी में अचानक पानी बढ़ा। हालांकि अभी तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
क्यों आई अचानक बाढ़?
नदी में अचानक बाढ़ की असली वजह अभी साफ नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि चुमनुब्री-6 में लोकपा और चुमलिंग के बीच बूढ़ी गंडकी की सहायक नदी स्यार का बहाव रुक गया था। ऊंचाई वाले इलाके में चुन्चुब्री स्यारी नदी का पानी बंद होने से एक अस्थायी झील बन गई थी, जो टूटने के बाद तेज बहाव के साथ नीचे आई। इसी वजह से निचले इलाकों में बाढ़ आई। इस बाढ़ से गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है और उसके कई उपकरण बह गए हैं।
भोटेकोशी त्रासदी की याद ताजा
चुमनुब्री की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग ने कहा कि बूढ़ी गंडकी की यह बाढ़ देखकर उन्हें रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ की याद आ गई। उन्होंने कहा कि दर्जनों मकान बह गए हैं और अभी नुकसान का सही आकलन कर पाना मुश्किल है। बता दें, कि 26 अगस्त को त्रिशूली और भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में 1455 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 5 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।












