कोरोना के बाद अब इबोला का खौफ! तेजी से फैल रहा वायरस, कांगो में 3000 से ज्यादा मौतें, WHO भी चिंतित

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नई दिल्ली: कोरोना महामारी की भयावह यादें अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई हैं कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एक और जानलेवा बीमारी को लेकर चिंता बढ़ गई है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से फैलने का दावा किया जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक इस बीमारी से 3,007 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 6,186 पहुंच गई है. बढ़ते आंकड़ों ने स्वास्थ्य एजेंसियों और कई देशों की सरकारों की चिंता बढ़ा दी है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कांगो में इबोला का प्रकोप देश के इतिहास के सबसे गंभीर संकटों में बदलता जा रहा है. उत्तर-पूर्वी हिस्से से शुरू हुआ यह संक्रमण अब कई क्षेत्रों तक पहुंच चुका है और बड़ी आबादी इसके खतरे की जद में है. लगातार बढ़ती मौतों ने स्थानीय लोगों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है.

शहर दर शहर इबोला का ‘कहर’

गुरुवार को जारी होने वाले नए स्वास्थ्य बुलेटिन में संक्रमितों और मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. कांगो में इबोला फैलने की आधिकारिक घोषणा 15 मई को इतुरी प्रांत में की गई थी. हालांकि, कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की शुरुआत जनवरी 2026 में ही हो गई थी.

कांगो की सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राहत एजेंसियां संक्रमण को रोकने के लिए लगातार काम कर रही हैं. इसके बावजूद इबोला अब छह प्रांतों तक फैल चुका है. बीमारी पर काबू पाने में सबसे बड़ी मुश्किल कमजोर निगरानी व्यवस्था, असुरक्षा और स्थानीय समुदायों के बीच विरोध को माना जा रहा है. इन कारणों से संक्रमित लोगों की समय पर पहचान और इलाज प्रभावित हो रहा है.

WHO के अनुमान के मुताबिक, इबोला से होने वाली करीब 60 प्रतिशत मौतें अस्पतालों के बाहर होती हैं. इसका मतलब है कि कई मरीजों की हालत गंभीर होने या मौत होने से पहले ही उनके संक्रमित होने की जानकारी स्वास्थ्य व्यवस्था तक नहीं पहुंच पाती.

क्या 2026 का प्रकोप सबसे खतरनाक?

2026 में सामने आया इबोला संकट कांगो के लिए बेहद गंभीर माना जा रहा है. इसकी तुलना 2018-2020 के बड़े प्रकोप से भी की जा रही है. वहीं, पश्चिम अफ्रीका में 2014-2016 के दौरान फैले इबोला ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था. उस दौरान गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से अधिक लोग संक्रमित हुए और 11,000 से ज्यादा मौतें हुई थीं.

कब-कब महामारी ने डराया?

कोविड से पहले 1918-1919 की इन्फ्लुएंजा महामारी को मानव इतिहास की सबसे घातक महामारियों में गिना जाता था. करीब 108 साल पहले फैले इस वायरस ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में लोगों की जान ली थी. अनुमान के मुताबिक उस दौर में 5 से 10 करोड़ मौतें हुईं. इसके बाद 1957-58 का एशियाई फ्लू, 1968-69 का हांगकांग फ्लू और 2009-10 का स्वाइन फ्लू भी दुनिया के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियां बने.

कोरोना महामारी में आधिकारिक तौर पर दुनियाभर में करीब 71 लाख मौतों की पुष्टि हुई. हालांकि, अतिरिक्त और अप्रत्यक्ष मौतों को जोड़ने पर WHO तथा अन्य आंकड़ा एजेंसियों ने वास्तविक संख्या 1.8 करोड़ से 3 करोड़ के बीच होने का अनुमान लगाया है. 

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