नई दिल्ली: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अरबपति एलन मस्क के रिश्ते एक बार फिर चर्चा में हैं। कभी दोनों के बीच सार्वजनिक रूप से मतभेद देखने को मिले थे, लेकिन अब मस्क की ओर से रिपब्लिकन उम्मीदवारों को दी गई भारी आर्थिक मदद ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। चुनाव से पहले मस्क ने दक्षिणपंथी उम्मीदवारों और उनका समर्थन करने वाले संगठनों पर करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं।
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने जुलाई से अब तक रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में काम करने वाले संगठनों को 276 मिलियन डॉलर दान दिए हैं। यह रकम भारतीय मुद्रा में करीब 2,638 करोड़ रुपये होती है। इस योगदान के साथ वह आगामी मिडटर्म चुनाव में सबसे बड़े निजी दानदाताओं में शामिल हो गए हैं।
रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर जमकर खर्च
रिपोर्ट के अनुसार, मस्क ने सीनेट लीडरशिप फंड को 158 मिलियन डॉलर दिए। यह संगठन रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों की मदद करता है। इसके अलावा, उन्होंने अपने संगठन अमेरिका पीएसी को 76 मिलियन डॉलर दिए, जो चुनावी अभियानों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करता है।
वहीं, कांग्रेसनल लीडरशिप फंड को 20 मिलियन डॉलर दिए गए। यह संगठन प्रतिनिधि सभा के रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में काम करता है। रिपब्लिकन गवर्नर्स एसोसिएशन और टेक्सास के सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन के समर्थन वाले संगठन को भी 10-10 मिलियन डॉलर देने की जानकारी सामने आई है।
ट्रंप और मस्क के रिश्तों में फिर नरमी?
ट्रंप और मस्क के बीच पहले कई मुद्दों पर टकराव हुआ था। मस्क ने ट्रंप प्रशासन में सरकारी खर्च कम करने से जुड़ी जिम्मेदारी संभाली थी, लेकिन बाद में मतभेदों के चलते यह भूमिका छोड़ दी। अब चुनाव से पहले मस्क की आर्थिक मदद को दोनों के रिश्तों में आए बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
मिडटर्म चुनाव क्यों है अहम?
3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत बचाने की कोशिश करेगी। वहीं, डेमोक्रेट्स अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं। ऐसे में मस्क की आर्थिक मदद उम्मीदवारों के प्रचार अभियान को ताकत दे सकती है। हालांकि, चुनाव में जीत का फैसला केवल पैसे से नहीं, बल्कि मतदाताओं की पसंद और देश के अहम मुद्दों से भी होगा।












