नई दिल्ली: साइबर ठगों ने पुलिस आतंकवाद निरोधक दस्ते और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के अधिकारी बनकर लोगों को डराने का नया हथियार बनाया लेकिन दिल्ली पुलिस की खुफिया निगरानी और तकनीकी जांच ने इस जाल की कई कड़ियां खोल दी हैं। दिल्ली पुलिस की खुफिया संलयन एवं रणनीतिक संचालन इकाई (आईएफएसओ) ने कंबोडिया समेत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में बैठे कथित विदेशी संचालकों से जुड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी की है। डीसीपी आईएफएसओ गौरव त्यागी ने बताया कि इस कार्रवाई में एक डिजिटल गिरफ्तारी मामले में 7.25 करोड़ रुपये सुरक्षित कराए गए जबकि एचडीएफसी और भारतीय स्टेट बैंक के खातों में 1.96 करोड़ रुपये पर रोक लगाई गई।
69 वर्षीय सेवानिवृत्त वैज्ञानिक को बनाया निशाना
मामले की शुरुआत सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रदीप कुमार दास की शिकायत से हुई। आरोप है कि 14 अगस्त 2026 को उन्हें फोन कर ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस आतंकवाद निरोधक दस्ते और राष्ट्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। आधार कार्ड का इस्तेमाल धनशोधन के मामले में होने की झूठी कहानी सुनाकर गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। इसके बाद धन के सत्यापन के बहाने उनसे तीन बैंक खातों में एक करोड़ 25 लाख नौ हजार रुपये अंतरित करा लिए गए। आरोपियों ने कथित तौर पर लगातार वीडियो संपर्क बनाए रखकर उनकी गतिविधियों पर भी नियंत्रण रखा।
द्वारका के फ्लैट से खुला साइबर ठगी का राज
जांच के दौरान पुलिस को द्वारका के रामफल चौक स्थित महामाया अपार्टमेंट में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। यहां एक बैंक खाते के संचालन के लिए कई लोगों के जुटने का संदेह था। पुलिस टीम ने कार्रवाई कर पांच आरोपियों को पकड़ा। जांच में सामने आया कि एमआर ट्रेडर्स के नाम से एचडीएफसी बैंक खाते का इस्तेमाल कथित साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार आरोपियों के मोबाइल फोन में संदिग्ध संदेश टेलीग्राम बातचीत और ‘एसएमएस टूल्स’ नामक अनुप्रयोग मिला। यह अनुप्रयोग संदेशों और एकबारगी पासवर्ड को दूसरे लोगों तक स्वतः भेजने के लिए इस्तेमाल किए जाने के संदेह में है। इससे विदेशी संचालकों और भारतीय सहयोगियों के बीच समन्वय की आशंका मजबूत हुई।
साढ़े पांच प्रतिशत कमीशन, क्रिप्टोकरेंसी से लेनदेन
जांच में अनिश खान को कथित मुख्य संचालक बताया गया है। पुलिस का आरोप है कि वह विदेशी संपर्कों के साथ टेलीग्राम के जरिए जुड़ा था और बैंक खातों के संचालन में भूमिका निभाता था। कथित तौर पर उसे साढ़े पांच प्रतिशत कमीशन मिलता था जिसका भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के रूप में लेकर बाद में भारतीय रुपये में बदला जाता था। अन्य आरोपी बैंक खाते उपलब्ध कराने, परिचय कराने, रहने-खाने की व्यवस्था और रकम के बंटवारे में मदद करने के संदेह में हैं।
आंध्र प्रदेश में 10.25 करोड़ की ठगी, 7.25 करोड़ सुरक्षित
पुलिस के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में 79 वर्षीय शिकायतकर्ता से डिजिटल गिरफ्तारी के नाम पर 10.25 करोड़ रुपये की कथित ठगी हुई थी। समन्वित कार्रवाई से इसमें से 7.25 करोड़ रुपये सुरक्षित या फ्रीज कराए गए। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में निवेश पर ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर 21 लाख रुपये ठगने का मामला भी सामने आया। दिल्ली में 77 लाख रुपये की कथित डिजिटल गिरफ्तारी ठगी की जांच भी जारी है।
78 शिकायतें, 73 करोड़ रुपये की रकम जांच के घेरे में
आईएफएसओ ने छह मोबाइल फोन, बैंक खाते की चेकबुक और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, सात टेलीग्राम चैनलों के जरिए कथित तौर पर बैंक खातों की खरीद-फरोख्त की जा रही थी। व्हाट्सऐप और टेलीग्राम बातचीत के विश्लेषण में विभिन्न राज्यों की 78 शिकायतों से संबंध सामने आया है, जिनमें कुल 73 करोड़ रुपये की रकम शामिल बताई गई है।
यह कार्रवाई पुलिस उपायुक्त गौरव त्यागी के समग्र पर्यवेक्षण और सहायक पुलिस आयुक्त विवेकानंद झा की निगरानी में निरीक्षक सतीश कुमार के नेतृत्व वाली टीम ने की। टीम में उपनिरीक्षक बृजेश तथा हेड कांस्टेबल मनोज कुमार, राजेश, दीपक, पवन, धर्मेंद्र और कांस्टेबल शेखर चंद्र शामिल रहे। पुलिस अब धन के प्रवाह विदेशी संपर्कों और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान में जुटी है। डीसीपी ने कहा कोई भी असली पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर आपको गिरफ्तार घोषित कर धन हस्तांतरित करने के लिए बाध्य नहीं करती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं पैसे न भेजें और तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
Reported By: Pankaj Rai












