नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ सरकार ने अब आर-पार की तैयारी शुरू कर दी है। एक तरफ सड़कों पर 150 नई इलेक्ट्रिक बसें उतारी गईं तो दूसरी तरफ हवा में घुले जहर पर नजर रखने के लिए 13 नए वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र शुरू किए गए। सेवा संकल्प अभियान के तहत केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आनंद विहार अंतरराज्यीय बस अड्डे से नई बसों को हरी झंडी दिखाई। वहीं शास्त्री पार्क स्थित प्रदूषण नियंत्रण समिति के एकीकृत नियंत्रण केंद्र से प्रदूषण निगरानी व्यवस्था को मजबूती मिली।
परिवहन, तकनीक और बुनियादी ढांचे पर एक साथ काम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए परिवहन आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे पर एक साथ काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाना है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि एकीकृत नियंत्रण केंद्र प्रदूषण के खिलाफ युद्ध कक्ष की तरह काम कर रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कैमरों और वास्तविक समय के आंकड़ों से 700 से अधिक निर्माण स्थलों सड़क सफाई खुले में कचरा जलाने और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। नए केंद्रों के साथ निगरानी केंद्रों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है।
इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ी, लक्ष्य 14 हजार बसें
परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह के अनुसार नई बसों के शामिल होने से दिल्ली में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 5,238 पहुंच गई है। राजधानी के कुल बस बेड़े में लगभग 6,988 बसें हैं। पांच स्थानों पर विद्युत वाहन चार्जिंग केंद्र भी शुरू किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2028-29 तक बस बेड़े को लगभग 14 हजार तक पहुंचाना है। अब चुनौती इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने की है ताकि दिल्लीवासियों को प्रदूषण से राहत मिल सके।
REPORTED BY: Pankaj Rai












