आठ महीने की मेहनत, और सिर्फ कुछ हफ्तों में सब कुछ फिर से पहले जैसा। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में अजनार नदी को अकेले साफ करने वाले युवा पर्यावरण कार्यकर्ता बिट्टू तबाही (असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी) ने एक भावुक वीडियो साझा किया है। नदी एक बार फिर प्लास्टिक, पॉलीथिन और कचरे से भर गई है, लेकिन बिट्टू ने हार मानने से इनकार कर दिया है।
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @bittu_tabahi हैंडल से डाला गया है। बिट्टू ने लिखा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनकी इतनी मेहनत इस तरह बेकार हो जाएगी। वीडियो में उनकी निराशा साफ दिखती है। फिर भी वे कहते हैं कि तैरना नहीं आता, पर सफाई जारी रखेंगे और रोज थोड़ा-थोड़ा करके नदी को दोबारा साफ करेंगे। उन्होंने फॉलोअर्स से यह भी पूछा कि इतने बड़े पैमाने का कचरा कैसे हटाया जाए।
बिट्टू ने 1 सितंबर 2026 को नदी की सफाई पूरी की थी, लेकिन महीनेभर बाद ही नदी फिर गंदी हो गई। 12 अक्टूबर को उन्होंने वीडियो पोस्ट कर किनारे जमा पॉलीथिन, फूल-माला और कचरा दिखाया। साथ में अपील की कि लोग नदी में कचरा न फेंकें, क्योंकि गंदा करना आसान है, पर साफ करने में बहुत मेहनत लगती है। अगले दिन 13 अक्टूबर को वे फिर नदी किनारे पहुंचे। दस्ताने पहनकर उन्होंने किनारे से कचरा उठाया और पानी में उतरकर पॉलीथिन निकाली। उस एक दिन में उन्होंने 10 बड़ी पॉलीथिन कचरा बाहर निकाला।
लोगों ने क्या कहा
वीडियो देखकर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई। एक यूजर ने लिखा कि नदी को दोबारा गंदा देखकर दुख हुआ, पर बिट्टू हीरो हैं और उन्हें हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। दूसरे ने नागरिक जिम्मेदारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत के लोग साफ माहौल के हकदार नहीं हैं। कई लोगों का मानना था कि सफाई किसी एक इंसान का काम नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यह घटना दिखाती है कि नदी बचाने की राह कितनी मुश्किल है। जब तक लोग कचरा फेंकना बंद नहीं करेंगे, तब तक किसी भी सफाई का असर टिकना कठिन है। अजनार नदी इलाके के लोगों की जीवनरेखा मानी जाती है, इसलिए उसका फिर प्रदूषित होना स्थानीय लोगों की चिंता भी बढ़ा रहा है। बिट्टू इससे पहले यमुना और कुछ अन्य जगहों पर भी सफाई अभियान चला चुके हैं।
जब मुख्यमंत्री तक ने की थी तारीफ
बिट्टू ब्यावरा के रहने वाले 21 साल के बीएससी छात्र हैं। उन्होंने 26 जनवरी 2026 को अजनार नदी की सफाई शुरू की थी। उस समय नदी कचरे, प्लास्टिक और पूजा सामग्री से भरी थी, पानी से बदबू आती थी और जलीय जीवन लगभग खत्म हो चुका था। तैरना नहीं आने और सरकारी मदद न मिलने के बावजूद उन्होंने अकेले काम शुरू किया। इस काम में उन्होंने अपनी जेब से करीब 30,000 रुपये खर्च किए। महीनों की मेहनत के बाद नदी साफ हुई और उनका काम वायरल हो गया। आनंद महिंद्रा, मुख्यमंत्री मोहन यादव और नीदरलैंड की संस्था द ओशन क्लीनअप के सीईओ बोयान स्लाट ने भी उनकी सराहना की। स्लाट ने तो उन्हें नौकरी का प्रस्ताव भी दिया था।












