
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में सप्तमी की शाम भगदड़ मचने से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 35 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घटना 17 अक्टूबर की शाम करीब 7:40 बजे हुई। उस समय पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे और इलाके में बारिश भी हो रही थी। कोलकाता पुलिस के मुताबिक, यह हादसा गिरिश पार्क थाना क्षेत्र के सरदा पार्क (चोरबागान) दुर्गा पूजा पंडाल के निकास द्वार पर हुआ।
भीड़ अधिक होने के कारण लोगों के बीच अचानक धक्का-मुक्की शुरू हो गई। कुछ रिपोर्टों में पंडाल के एक हिस्से पर भीड़ का दबाव बढ़ने से उसके ढहने की बात भी सामने आई है। हालांकि, हादसे के सभी कारणों की पुष्टि होना बाकी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को इलाज के लिए कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। हादसे के बाद पंडाल में लोगों की आवाजाही रोक दी गई।
संकरे गेट और कम रोशनी पर उठे सवाल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पंडाल में भारी भीड़ थी। कुछ लोगों ने बताया कि कई श्रद्धालु बेहोश हो गए और उन्हें मोटरसाइकिलों से अस्पताल पहुंचाया गया। एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने प्रवेश और निकास द्वार संकरे होने के साथ-साथ पर्याप्त रोशनी की कमी का भी जिक्र किया। पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रभावित लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किया है।
प्रधानमंत्री ने किया मुआवजे का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी अस्पताल पहुंचे और घायलों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटना पर दुख जताया और अपने निर्धारित बंगाल दौरे के कार्यक्रम स्थगित करने की जानकारी दी।
पूजा समिति के पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
हादसे के बाद चोरबागान दुर्गा पूजा समिति के महासचिव जयंत बनर्जी समेत अन्य पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। लगातार बारिश के बावजूद पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई थी। इस घटना ने त्योहार के दौरान भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।












