नई दिल्ली: बांग्लादेश के चटगांव एयरपोर्ट पर 17 अक्टूबर की रात एक ऐसा विमान उतरा, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह विमान पाकिस्तान के लाहौर से उड़कर भारतीय हवाई क्षेत्र के ऊपर से गुजरा और फिर बांग्लादेश पहुंचा। खास बात यह रही कि शुरुआत में इसकी उड़ान से जुड़ी कई अहम जानकारियां उपलब्ध नहीं थीं। विमान के उतरने के कुछ समय बाद उसी एयरपोर्ट पर बांग्लादेश वायु सेना का एक हेलीकॉप्टर भी पहुंचा। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इस विमान की उड़ान का मकसद क्या था?
लाहौर से चटगांव तक कैसे पहुंचा विमान?
रिपोर्ट के मुताबिक, नौ सीटों वाला ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान 17 अक्टूबर को पाकिस्तान के लाहौर स्थित अल्लामा इकबाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से रवाना हुआ था। रात करीब 9:50 बजे यह बांग्लादेश के चटगांव स्थित शाह अमानत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा।
नॉर्थ ईस्ट न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, विमान जब भारतीय हवाई क्षेत्र में बिहार के आसपास था, तब रात करीब 9:20 बजे उसके पायलट ने चटगांव एयर ट्रैफिक कंट्रोल से रेडियो पर संपर्क किया। इसके बाद उसे एयरपोर्ट पर पहुंचने के लिए जरूरी जानकारी दी गई।
विमान की पहचान छिपी होने से बढ़ा रहस्य
शुरुआत में फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Flightradar24 पर विमान का रजिस्ट्रेशन नंबर और फ्लाइट की पहचान उपलब्ध नहीं थी। एयरक्राफ्ट इंफॉर्मेशन पैनल पर इसे बीचक्राफ्ट किंग एयर B200 बताया गया था। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विमान की बैरोमेट्रिक ऊंचाई 2,275 फीट और ग्राउंड स्पीड 227 नॉट्स थी।
बाद में रिपोर्ट में विमान का कॉल साइन N63LB बताया गया। हालांकि, शुरुआती जानकारी से यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि विमान का मालिक कौन है और इसकी उड़ान का वास्तविक उद्देश्य क्या था।
विमान में यात्री नहीं, फिर कहां जाना था?
एयरपोर्ट सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार, विमान में पायलट के अलावा कोई यात्री नहीं था। बताया गया कि चटगांव में ईंधन भरवाने के बाद इसे वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी स्थित तान सोन न्हात इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए रवाना होना था। विमान के उतरने के करीब 40 मिनट बाद बांग्लादेश वायु सेना का एक हेलीकॉप्टर भी एयरपोर्ट पर उतरा। रिपोर्ट के मुताबिक, हेलीकॉप्टर का कॉल साइन MI748 था और बाद में वह पास के जहुरुल हक एयर बेस पहुंचा। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में विमान की उड़ान के पीछे किसी विशेष अभियान या सैन्य गतिविधि की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में लाहौर से चटगांव तक इसकी यात्रा और शुरुआती पहचान संबंधी जानकारी का उपलब्ध न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।












