त्योहारी खरीदारी का मौसम शुरू होने से पहले सोने के बाजार में बड़ा बदलाव दर्ज किया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सप्ताह के दौरान कीमतों में करीब चार प्रतिशत की गिरावट आई, जो पिछले चार महीनों से अधिक समय का कमजोर साप्ताहिक प्रदर्शन बताया गया है। इसका असर भारत के वायदा बाजार पर भी पड़ा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोने का भाव कारोबार के दौरान 1,41,334 रुपये प्रति 10 ग्राम तक नीचे आया। सप्ताह के आखिर में कीमत करीब 1,42,000 रुपये के आसपास रही।
इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की महंगाई, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता जैसे कारक बताए जा रहे हैं। ऐसे में दिवाली के लिए गहने खरीदने वालों के सामने सवाल है कि मौजूदा भाव पर खरीदारी की जाए या बाजार की अगली चाल का इंतजार किया जाए।
तेल महंगा होने से सोने पर क्यों बढ़ा दबाव?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई बढ़ने की आशंका को मजबूत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं की चिंता भी बाजार के माहौल को प्रभावित कर रही है।
यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकता है। सोना नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए ऊंची दरों और सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले बेहतर रिटर्न के माहौल में इसकी मांग प्रभावित हो सकती है। मजबूत अमेरिकी डॉलर भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में किन स्तरों पर नजर?
Enrich Money के मुख्य कार्यकारी पोनमुडी आर के मुताबिक, कॉमेक्स बाजार में सोने ने 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास अहम स्तर बनाया हुआ है। इसके नीचे टिकाऊ गिरावट आने पर कीमत 3,900 डॉलर तक जा सकती है। ऊपर की तरफ 4,070 से 4,100 डॉलर का क्षेत्र शुरुआती बाधा माना गया है। इसके बाद 4,170 से 4,200 डॉलर का दायरा महत्वपूर्ण हो सकता है।
घरेलू बाजार में और सस्ता हो सकता है सोना?
विश्लेषक के अनुसार, MCX पर 1,40,000 से 1,41,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का क्षेत्र तत्काल समर्थन दे सकता है। यदि कीमत इसके नीचे जाती है, तो 1,37,500 से 1,38,300 रुपये तक गिरावट की संभावना पर नजर रखी जा सकती है। तकनीकी संकेतकों में कमजोरी बिकवाली के दबाव की ओर इशारा करती है, हालांकि ज्यादा गिरावट के बाद अस्थायी तेजी भी आ सकती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर की बैठक तथा महंगाई से जुड़े आगामी आंकड़े भी सोने की दिशा प्रभावित कर सकते हैं।
दिवाली पर खरीदारी करें या इंतजार?
जिन लोगों को शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने ही हैं, वे जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं। मौजूदा गिरावट को अंतिम निचला स्तर मान लेना उचित नहीं होगा। आभूषणों में मेकिंग चार्ज और अन्य लागतें भी जुड़ती हैं, इसलिए उन्हें कम अवधि के निवेश के रूप में देखना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति बेहतर?
एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय अलग-अलग चरणों में खरीदारी करने से कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कुछ हद तक बांटा जा सकता है। अल्पकालीन मुनाफा चाहने वाले निवेशक बाजार में स्थिरता के संकेत मिलने तक प्रतीक्षा करने पर विचार कर सकते हैं। गोल्ड ETF जैसे विकल्पों में निवेश से पहले शुल्क, जोखिम और संबंधित उत्पाद की शर्तें समझना जरूरी है। सोने की कीमत आगे किस दिशा में जाएगी, इसकी गारंटी नहीं है।












